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Employee Leader @ सरकार चाहे किसी की भी हो Employees का उत्पीड़न नहीं रूकता

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शिमला। प्रदेश के सबसे बड़े और ताकतवर महासंघ में वर्चस्व को लेकर तलवारें म्यान से बाहर आ गई है और इस जंग में सबसे ज्यादा नुकसान कर्मचारियों का होता है। ऐसे में कर्मचारियों को आज ऐसे नेता को चुनना चाहिए जो सही मायने में Employees की समस्याओं को समझकर उसे सरकार के समक्ष रखे। यह कहना है अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व मुख्य प्रवक्ता Harish Guleria का। गुलेरिया ने कहा कि सरकार चाहे किसी की भी हो BJP या Congress की, सभी Employees का Harassment करने से नहीं चूकते। उन्होंने कहा कि बिना चुनाव के किसी को भी मान्यता देना और येस मैन को कर्मचारियों का नेता थोपना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि  पिछली सरकार में यह जंग काफी लंबी लड़ी गई। उनका कहना था कि पूर्व कांग्रेस सरकार में भी सुरेंद्र मनकोटिया हाशिए पर गए और एसए जोगटा अध्यक्ष बन गए और उसका नतीजा सबके सामने है।
उन्होंने कहा कि जोगटा जेसीसी की बैठक भी नहीं करवा सके और यहां तक कि शिमला जिला की एक भी बैठक तक नहीं हुई और इसका नुकसान कर्मचारियों को हुआ। Guleria ने कहा कि महासंघ में हमेशा ही धड़ेबाजी रही हैए लेकिन अब हद ही हो गई है और हर कोई Employees की कमान अपने हाथ में रखना चाहता है। उनका कहना था कि आज प्रदेश में सभी Employees को एक झंडे के नीचे लाने की पहल विनोद कुमार ने की है और वह स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि फरवरी में बिलासपुर में सभी जिलों के कर्मचारियों की बैठक में महासंघ के चुनाव करवाने का फैसला लिया। इसके बाद तदर्थ कमेटी बनाई गई और इसे जिलों के चुनाव करवाने की जिम्मेवारी सौंपी गई,उसी निर्णय के तहत ही कर्मचारी महासंघ के चुनाव करवाए जा रहे हैं।
Guleria ने कहा कि पहले तो कर्मचारियों के दो धड़े थे, लेकिन अब तो पता लगाना ही मुश्किल है कि कितने धड़े हैं। उन्होंने कहा कि सभी नेता Employees का हित कम और अपना हित ज्यादा देख रहे हैं। उनका कहना था कि इस धड़ेबंदी में Employees बुरी तरह से पिस रहा है। ऐसे में सभी Employees को अपना नेता चुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि Employees को अपनी ताकत दिखानी होगी, तभी कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहेंगे। 

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