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हैरानीः Mandi के हिमाचल ग्रामीण भंडार में चल रहा रोजगार प्रशिक्षण संस्थान

हैरानीः Mandi के हिमाचल ग्रामीण भंडार में चल रहा रोजगार प्रशिक्षण संस्थान

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स्वयं सहायता समूहों ने भवन को लेकर नहीं दिखाई कोई रुचि

वी कुमार/मंडी। वर्ष 2005 में भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण भंडार स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना के तहत मंडी जिला को एक बेहतरीन भवन की सौगात दी थी, लेकिन अब यहां पीएनबी बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान चला रहा है। बहरहाल मनाली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे 21 पर मंडी जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर पंडोह के पास इस भवन का निर्माण किया गया था और इसे नाम राज्य स्तरीय हिमाचल ग्रामीण भंडार दिया गया था।

हालांकि इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पाद बेचने के लिए एक मार्केट मुहैया करवाना था, लेकिन करीब एक करोड़ की लागत से बने इस भवन के प्रति स्वयं सहायता समूहों ने कोई रूचि नहीं दिखाई। वर्षों तक इस भवन का कोई इस्तेमाल नहीं हो सका। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यहां पर ग्रामीण उत्पादों को बेचने की योजना थी, ताकि लोग यहां के हस्तनिर्मित उत्पादों को खरीद पाते और लोगों को आमदन होती, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। बहरहाल, मौजूदा समय में यहां पर पंजाब नेशनल बैंक का ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान चल रहा है। हालांकि यह संस्थान इलाके के बेरोजगार युवाओं के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हो रहा है क्योंकि उन्हें घर द्वार पर स्वरोजगार का निशुल्क प्रशिक्षण मिल रहा है।

संस्थान के निदेशक के अनुसार 31 मार्च 2017 तक 2599 लोग प्रशिक्षण प्राप्त करके स्वरोजगार की राह में आगे बढ़ चुके हैं। प्रशासन के पास जब भवन के सही इस्तेमाल का कोई रास्ता नहीं रहा तो फिर इन दुकानों को किसी और मकसद से किराए पर देना पड़ा। आज यहां भू-अर्जन अधिकारी का कार्यालय भी चल रहा है और इसके बदले में प्रशासन सभी दुकानों का किराया वसूल कर आमदनी कमाने में लगा हुआ है। उपायुक्त मंडी मदन चौहान की मानें तो मौजूदा समय में एक सहकारी सभा ने यहां कुछ दुकानें किराए पर ली हैं और बाकी दुकानें किसी और कार्य के लिए किराए पर दी गई हैं। यह भवन आज भी कागजों में राज्य स्तरीय ग्रामीण भंडार ही है, लेकिन हकीकत यह है कि यहां से ग्रामीण उत्पाद पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। दूसरी तरफ स्वयं सहायता समूह किसी दूसरे स्थान पर अपनी दुकानें सजाकर आजीविका कमाने में लगे हुए हैं।

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