दबी जुबान में बेटे आश्रय के लिए सांसद के टिकट की इच्छा जता गए ऊर्जा मंत्री

हिमाचल अभी अभी को एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बेबाक बोले अनिल शर्मा 

दबी जुबान में बेटे आश्रय के लिए सांसद के टिकट की इच्छा जता गए ऊर्जा मंत्री

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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने खुले तौर पर तो नहीं, लेकिन दबी जुबान से अपने बेटे आश्रय शर्मा के लिए मंडी संसदीय क्षेत्र से आगामी लोकसभा चुनाव के लिए टिकट मिलने की इच्छा जता दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीदवारी का फैसला पार्टी हाईकमान को करना है। लेकिन ऊर्जा मंत्री इशारों में यह भी कह गए कि चाहे 1993 हो या फिर पिछला चुनाव, उन्होंने मंडी से जब भी चुनाव लड़ा विपक्षी दल का खाता नहीं खुला। 
हिमाचल अभी अभी के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि आश्रय अपनी इच्छाशक्ति से राजनीति में आए हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं तो बिना इच्छाशक्ति के साथ राजनीति में आया हूं, लेकिन आश्रय इच्छाशक्ति के साथ काम करना चाहते हैं। यदि उन्हें कभी मौका मिले तो वे काफी आगे जा सकते हैं।’  उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान को फैसला करना है कि वह मंडी से किसे उम्मीदवार बनाए। उन्होंने कहा, ‘1993 में जब मैंने कांग्रेस के टिकट से मंडी से पहला चुनाव लड़ा था, तो बीजेपी का खाता नहीं खुल सका था। अब जबकि मैं बीजेपी में हूं तो मंडी में कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका है।’ उन्होंने कहा कि यह मंडी के लोगों का एक प्यार है जो पंडित सुखराम के साथ हमेशा रहा है। इसलिए लोग उन्हें हमेशा याद भी रखते हैं। 

सोलर रूफ टॉप का नया कंसेप्ट

हिमाचल प्रदेश की ऊर्जा नीति के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने केंद्र सरकार को हाइडल सेक्टर के भीतर पैदा होने वाली ऊर्जा को रिन्यूअल पावर एनर्जी के साथ जोड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे हिमाचल प्रदेश की बिजली बाजार में रिन्यूअल पावर के तहत बिकेगी, जिससे राज्य को ज्यादा फायदा मिलेगा। इससे हिमाचल प्रदेश में हाइडल सेक्टर को पुनर्जीवित करने में बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि जल्द ही प्रदेश में सोलर रूफ टॉप का एक नया कंसेप्ट आने वाला है। इससे बनी बिजली को बिजली बोर्ड खरीदेगा, जो कि 1.80 रुपए प्रति यूनिट की पड़ेगी। सरकार ने प्रायवेट सेक्टर को भी बिजली बोर्ड के साथ जोड़ा है। इससे राज्य ने 20 मेगावाट का टारगेट हासिल किया है। इसके साथ ही प्रायवेट सेक्टर के लिए 10 मेगावाट और सरकारी क्षेत्र के लिए 10 मेगावाट का ही टारगेट रखा है। ऊना में पंचायत, जिला परिषद की बिल्डिंगों पर रूफ टॉप लगाने का फैसला किया है। इससे सालाना 25 लाख रुपए की बचत होगी। इस तरह करीब 6 साल में डेढ़ करोड़ रुपए की लागत पूरी वसूल हो जाएगी।

हाइडल में 20 हजार करोड़ के निवेश का टारगेट

ग्लोबल इन्वेस्टर मीट में ऊर्जा क्षेत्र के भीतर निवेश की संभावनाओं पर ऊर्जा मंत्री ने बताया कि धर्मशाला में अगले साल होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर मीट में सरकार ने हाइडल सेक्टर में 20 हजार करोड़ निवेश का टारगेट है। कुछ सालों ने हिमाचल में हाइडल सेक्टर के लिए पहले जैसा माहौल नहीं है। जनरेशन कॉस्ट भी जो पहले 4-5 करोड़ रुपए प्रति मेगावॉट बनती थी, वह अब 15 करोड़ से ऊपर जा चुकी है। फिलहाल हाइडल ऊर्जा में जनरेशन कॉस्ट 8-9 रुपए प्रति मेगावाट पड़ रही है, जबकि सोलर में उत्पादन लागत कम है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इन सभी बातों को देखते हुए वे इन्वेस्टर मीट में हाइडल सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक रोडमैप बनाने जा रहे हैं। 

 

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