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दो बच्चों की मां ने Everest पर फहराया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का झंडा

दो बच्चों की मां ने Everest पर फहराया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का झंडा

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everest conquered: मोहिंदर भारती/रेवाड़ी। कहते हैं कि अगर हौंसले बुलंद हों तो कठिन से कठिन रास्ते भी आसान हो जाते हैं। कुछ ऐसे ही बुलंद हौंसलों की मिसाल पेश की है राजस्थान में जन्मी और हरियाणा की रहने वाली पेशे से स्टाफ नर्स, 39 वर्षीय आशा झाझडिया ने। आशा ने काम ही कुछ ऐसा किया कि हर ओर से उन्हें बधाईयां और शाबाशियां मिल रही हैं। जी हां, दो बच्चों की मां आशा ने अपनी उम्र के 39वें पड़ाव में विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करने का कारनामा कर दिखाया है। इतना ही नहीं, उन्होंने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और महिला सशक्तिकरण के झंडे भी गाड़े।

everest conquered: अमरनाथ यात्रा के दौरान पाला था सपना

माउंट एवरेस्ट को फतह करने का सपना आशा ने तब देखा जब साल 2015 में वह बाबा अमरनाथ के दर्शनों के लिए गईं। इस दौरान उन्होंने अपनी यात्रा बालटाल से होकर पैदल शुरु की और शाम ढ़लने तक वह वापस नीचे आ गईं। आशा की इस रफ्तार और बुलंद हौंसलों को वहां मौजूद फौजी भाइयों ने भी खूब सराहा। यही वह क्षण था जब आशा के मन में माउंट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने की लालसा जागी।


आशा ने इस बारे में जब अपने घर में बात की तो सभी ने एक बारगी इंकार किया। लेकिन आशा के हौंसले और जिद के आगे सबको हार माननी पड़ी। फिर शुरु हुआ एवरेस्ट के बारे में जानकारी जुटाने का सिलसिला। आशा ने इंटरनेट के माध्यम से सारी जरूरी जानकारी इकट्ठा की और अंतत: उन्हें HMI दार्जिलिंग से एवरेस्ट की चढ़ाई के दूसरे चरण में A श्रेणी में चढ़ाई करने का अवसर प्राप्त हुआ। आशा का हौंसला देख सब उस वक्त दंग रह गए जब उन्होंने नेपाल वाले आसान रास्ते को न चुन कर चाइना वाले कठिन रास्ते से चढ़ाई करने का फैसला लिया।

everest conquered: मौसम हुआ खराब तो किया वापस आने से इंकार

आशा ने एवरेस्ट का अपना सफर 8 मई 2017 को शुरु किया। 7500 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद मौसम के खराब हो जाने के चलते उन्हें वापस बेस कैंप आना पड़ा। इसके बाद उन्होंने 11 मई को फिर चढ़ाई शुरु की। इस बार भी मौसम बिगड़ा लेकिन आशा ने वापस आने से इंकार करते हुए वहीं रुक कर मौसम के ठीक होने का इंतजार करने का फैसला लिया और आखिरकार 22 मई 2017 को आशा ने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर भारत का तिरंगा फहरा कर वो कर दिखाया जो शायद हर किसी को असंभव सा लग रहा था। आशा की इस उपलब्धि की जानकारी उनके पति अजय को बेस कैंप द्वारा दी गई।

आशा का जन्म 7 जुलाई 1978 को राजस्थान के गांव घरडाना खुर्द जिला झुंझनू में हुआ। 1998 में आशा की शादी हरियाणा के गांव नारनौल के पास नागलियां में अजय कुमार के साथ हुई। आशा नौकरी करने के साथ ही PHD भी कर रही हैं। उनके दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र 17 व 14 साल है।

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