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ईवीएमः मतदाताओं के साथ छलावा और लोकतंत्र के लिए घातक

ईवीएमः मतदाताओं के साथ छलावा और लोकतंत्र के लिए घातक

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EVM Voting Process :  धर्मशाला। मतदान प्रक्रिया में ईवीएम का प्रयोग मतदाताओं के साथ छलावा है और लोकतंत्र के लिए घातक है। ऐसे में देश में मतदान के लिए पूर्व की तरह बैलेट पेपर व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए। जब तक चुनाव आयोग बैलेट पेपर व्यवस्था को पुन: नहीं अपनाता, तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा। यदि जरूरत पड़ी तो यूएनओ से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।  यह बात बैकवर्ड माइनॉरिटी कम्युनिटी फेडरेशन (बामसेफ) के प्रदेश कन्वीनर सुभाष चंद मुसाफिर ने वीरवार को धर्मशाला में प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति को आठ सूत्रीय मांग पत्र भी सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि  चुनाव आयोग एक पार्टी विशेष के महासचिव के भूमिका निभा रहा है।

देश में मतदान के लिए पूर्व की तरह बैलेट पेपर व्यवस्था की वकालत

उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग को एक 34 प्रश्नों वाली याचिका आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 6 (3) के अंतर्गत भी भेजी है,  जिस में चुनाव आयोग से ईवीएम प्रोग्रामिंग वेंडर अर्थात मशीने कहां से सप्लाई होतीं हैं, सिक्यूरिटी चेक कौन और कब कब करता है, वोटों के ऑडिट के क्या व्यवस्था है बारे अत्यंत मह्त्वपूर्ण जानकारी मांगी गई है। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष के नागरिकों को बाबा साहिब द्वारा ब्रिटिश हुकूमत से काफी जद्दोजहद के बाद मताधिकार दिलाया था। आज उस माताधिकार को वोटिंग मशीन के माध्यम से हेराफेरी करके लगभग समाप्त कर दिया गया है। पोलिंग बूथ पर वोटर को पता ही नहीं चलता की उस का वोट किस प्रत्याशी को पड़ा है। उन्होंने कहा कि जब 1928 से लेकर 1932 में बाबा साहिब भारत के प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक आदमी एक वोट की कीमत वाले मताधिकार के लिए अंग्रेजो से लड़ रहे थे तो मुख्य रूप से कांग्रेस ने तीन शर्तें रखीं कि मताधिकार केवल उस व्यक्ति को मिलना चाहिए जो मैट्रिक पास हो, दूसरा जिस के पास 10 एकड़ जमीन हो तीसरा जो इनकम टैक्स देता हो तो उस समय देश के 90 से 95 प्रतिशत नागरिक उपरोक्त तीनो शर्तों को पूरा नहीं करते थे।


यहां तक कि दलित पिछड़ों के लिए बाबा साहिब ने कम्युनल अवार्ड पास करवाया था जिसमें उन्हें दोहरे वोट की व्यवस्था थी जिसे पूना पैक्ट के माध्यम से गांधी ने यरवदा जेल में समाप्त करवा दिया। आज ईवीएम के माध्यम से आम नागरिकों के मताधिकार को मूलत: नष्ट करने का षड्यंत्र रच दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रयेक नागरिक को ईवीएम से चुनाव न करवा कर बैलेट पेपर से चुनाव करवाने हेतु शुरू किये गये आंदोलन में हिस्सा लेना चाहिए । मुसाफिर का कहना है कि विकसित देशों ने विश्वसनीयता के आभाव में ईवीएम को त्यागकर बेलेट पेपर प्रक्रिया चुनावों में अपनाइ है। भारत में न जाने ईवीएम के इस्तेमाल का दवाब कौन और क्यों डाल रहा है। 

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