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काम के बोझ तले मारे नेरवा के आईपीएच कर्मचारी, नहीं भरे जा रहे पद

काम के बोझ तले मारे नेरवा के आईपीएच कर्मचारी, नहीं भरे जा रहे पद

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नेरवा। आईपीएच मंडल नेरवा (IPH Mandal Nerwa) में फील्ड व कार्यालय स्टाफ की कमी के चलते एक कर्मचारी को पांच-पांच कर्मचारियों का कार्य करना पड़ रहा है। जिस वजह से न केवल सिंचाई व पेयजल योजनाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि कर्मचारियों को शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न भी झेलना पड़ रहा है। वर्ष 1984 में नेरवा में विभाग का आईपीएच मंडल खुलने के समय जो पद मंजूर किए गए थे, उनमें कोई बढ़ोतरी नहीं हो पाई है, जबकि सिंचाई और पेयजल योजनाएं कई गुना बढ़ कर पांच सौ के करीब पहुंच गई हैं। जल मंडल नेरवा में फील्ड स्टाफ  की कमी के कारण आए दिन उपभोक्ताओं के साथ-साथ यहां कार्यरत कर्मचारियों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अक्सर देखा गया है कि पेयजल स्कीमों के बाधित होने पर उपभोक्ताओं का गुस्सा विभाग के कर्मचारियों पर फूट पड़ता है।

विभाग इस समय मंडल के तहत आने वाले 352 राजस्व गांव की 1348 बस्तियों में चालू 475 विभिन्न योजनाओं के तहत पीने और सिंचाई का पानी उपलब्ध करवा रहा है। इसके अलावा दर्जनों नई स्कीमें निर्माणाधीन हैं। मंडल में इस समय फील्ड स्टाफ  के कुल 291 पद स्वीकृत हैंए जिनमें से 106 यानि चालीस फीसदी के करीब पद खाली पड़े हुए हैं, इनमें भी कई पद तो चार पांच साल तक से खाली हैं। कायदे से एक स्कीम को चलाने के लिए कम से कम दो कर्मचारी होने चाहिए। परंतु यहां पर तो इसके उल्टा एक कर्मचारी के पास दो से तीन स्कीमों का जिम्मा है।

मंडल के तहत रिक्त पदों का सिलसिलेवार ब्यौरा

स्टोर लिपिक दो में से दो, वर्क इंस्पेक्टर दस में से चार, सर्वेयर पांच में से चार, चालक तीन में से एक, फील्ड स्टाफ  का अहम हिस्सा माने जाने वाले फिटर के तीस में से 16 पद रिक्त होने से विभाग पंगु हो कर रह गया है। इसी प्रकार चौकीदार के बीस में से सोलह, बेलदार के 78 में से पांच, जबकि पंप अटेंडेंट के सभी 16 पद रिक्त पड़े हुए हैं। इसके आलावा डाइट कैडर में वर्क इंस्पेक्टर के स्वीकृत दोनों पद, फिटर के भी स्वीकृत सभी दस पद, मेसन के भी दोनों पद बेलदार के 100 में से 24 पद एवं चौकीदार व पंप अटेंडेंट का स्वीकृत एक एक पद खाली पड़ा हुआ है। करीब 35 साल पहले स्वीकृत 291 स्वीकृत पदों में से इन 106 रिक्त पदों को देखते हुए विभाग की हालत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

 

विभागीय सूत्रों की माने तो वर्तमान में चल रही 475 पेयजल व सिंचाई योजनाओं को सही और सुचारू रूप से चलाने के लिए वर्तमान में स्वीकृत पदों के अतिरिक्त चार सौ से अधिक और कर्मचारियों की आवश्यकता है। अब यदि कार्यालय स्टाफ  की बात की जाए तो स्थिति यहां पर भी कोई ज्यादा संतोषजनक नजर नहीं आती। कार्यालय स्टाफ  के भी 52 में से 19 यानी करीब चालीस फीसदी पद रिक्त हैं। इनमें सहायक अभियंता का एक, ड्राफ्ट्समैन का एक, कनिष्ठ अभियंता के दो, वरिष्ठ सहायक के चार, कनिष्ठ सहायक एक, स्टेनो का एक, सहायक केमिस्ट का एक, प्रयोगशाला सहायक का एक, चौकीदार के तीन व स्वीपर के तीन पद खाली पड़े हुए है। आईपीएच डिवीजन नेरवा में फील्ड व कार्यालय स्टाफ  की इस भारी कमी के चलते विभाग को न केवल फील्ड में चल रही पेयजल व सिंचाई योजनाएं चलाने में दिक्क्तें आ रही है, अपितु कार्यालय संबंधी कार्य भी प्रभावित होना भी लाजिमी है।

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