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किसान आंदोलन के एक साल पूरे, क्या खोया क्या पाया, यहां जानें पूरी कहानी

आज किसान आंदोलन को एक साल पूरे हो गए हैं

किसान आंदोलन के एक साल पूरे, क्या खोया क्या पाया, यहां जानें पूरी कहानी

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नई दिल्ली। आज किसान आंदोलन को एक साल पूरे हो गए हैं। अन्नदाता और देश ने इस दौरान क्या खोया और क्या पाया आइए आज इस बारे में तफसील से बातचीत करते हैं। दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से कृषि कानून लागू करने के बाद ठीक एक साल पहले आज ही के दिन 26 नवंबर 2020 को किसान आंदोलन की शुरुआत हुई थी।

कृषि कानून के खिलाफ किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आंदोलन शुरू किया था। किसानों के इस आंदोलन के बारे में मीडिया से बात करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि पिछले एक साल में किसानों ने कुछ नहीं खोया है, बल्कि एकजुटता पाई है। उन्होंने कहा कि घर पर रहकर आंदोलन कैसे चलता है, वैचारिक रूप से कैसे आंदोलन चलता है, ये सब हमने एक साल में सीखा है।

उन्होंने कहा कि किसानों के सभी उत्पाद आज आधे से भी कम भाव में बिकते हैं, तो हम कृषि कानूनों की वापसी के जीत का जश्न कहां से मनाएं। हमें तो सरकार से एमएसपी पर गारंटी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी बात नहीं मान रही है। एमएसपी पर गारंटी देने से किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा। वह ये दे नहीं रहे और फिर बहस छेड़ रहे हैं कि किसान नहीं मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के आज एक साल पूरे हुए हैं। तारीख पर तो लोग अपने आप ही आ जाते हैं। ट्रैक्टर क्या अफगानिस्तान का टैंक है क्या? ये हिंदुस्तान में या खेतों में चलने वाला ट्रैक्टर नहीं है?

राकेश टिकैत ने कहा कि 29 तारीख को ट्रैक्टर का प्रोग्राम है। इस दिन हम खुले रास्ते से ट्रैक्टर लेकर जाना चाहते हैं, सरकार ने एफिडेविट दे रखा है कि रास्ता खुला है। उन्होंने कहा कि आंदोलन ठीक जा रहा है। यह खेत से संसद की ओर जा रहा है। यह आंदोलन खेत में चलेगा और मजबूती से आगे बढ़ेगा। राकेश टिकैत ने कहा कि ये आंदोलन खेत से सियासत के रास्ते पर चलेगा और बीजेपी की तो खिलाफत करनी पड़ेगी, क्योंकि वे काम कर नहीं रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी और एआईएमआईएम पर सांप्रदायिक होने के आरोप लगाए।

यह भी पढ़ें: जीता अन्नदाता, हारा अंहकार, मुकेश अग्निहोत्री ने कृषि कानून वापस लेने को कहा सरकार की मजबूरी

आपको बता दें कि शुक्रवार 19 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने राष्ट्र को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने गुरु पर्व और कार्तिक पूर्णिमा के खास अवसर पर विवादित तीनों नए कृषि कानूनों (Agriculture Law) को वापस लेने की घोषणा की। पीएम मोदी ने इस मौके पर देश की जनता से माफी भी मांगी। उन्होंने कहा, ‘मैं आज देशवासियों से क्षमा मांगते हुए यह कहना चाहता हूं कि हमारी तपस्या में कोई कमी रह गई होगी। कुछ किसान भाइयों को समझा नहीं पाए। आज गुरुनानक देव का पवित्र पर्व है। ये समय किसी को दोष देने का समय नहीं है। आज पूरे देश को यह बताने आया हूं कि सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है।’ वहीं, किसान आंदोलन के दौरान अब तक करीब 700 किसानों की मौत हो चुकी है।

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