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नौकरी के बजाय प्राकृतिक खेती करके कमा रहे लाखों

नौकरी के बजाय प्राकृतिक खेती करके कमा रहे लाखों

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कुल्लू। जिला की भूईन पंचायत के किसान स्वर्ण सिंह ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती से अपनी लागत को कम कर मुनाफे को कई गुणा बढ़ाकर न सिर्फ जिला बल्कि प्रदेश के किसानों के लिए मिसाल पेश की है। स्वर्ण सिंह ने एमपीएड करने के बाद सरकारी या निजी नौकरी करने के बजाय कृषि-बागवानी को अपनाने का निर्णय लिया और ऐसा कभी नहीं हुआ कि स्वर्ण सिंह को अपने इस निर्णय पर पछतावा हुआ हो। खेती-बाड़ी में हर दिन नए उपयोग करने वाले स्वर्ण सिंह ने इसी साल से सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती(एसपीएनएफ) को अपनाया है। स्वर्ण सिंह ने प्रशिक्षण पाने के बाद एसपीएनएफ विधि को एक प्रयोग के तौर पर कुछ अनार के पौधों और दो बीघा के खेत में टमाटर की खेती से शुरू किया था। उन्होंने बताया कि टमाटर के बीज और गोबर व गोमूत्र की खरीद में उन्हें 2500 रूपये का खर्च आया। जबकि इससे उन्हें 70 हजार रूपये की कमाई हुई है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि टमाटर के बाद उन्होंने 2 हजार गोभी के पौधे लगाये हैं। इसमें भी उन्होंने किसी भी प्रकार के रसायन का प्रयोग न करके घर में तैयार होने वाले घटकों का प्रयोग किया है। उन्होंने बताया कि अब गोभी बाजार में बेचने के लिए तैयार हो गई है और इससे भी उन्हें अच्छी कमाई की उम्मीद है।

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पालमपुर में पद्मश्री सुभाष पालेकर से पाया प्रशिक्षण

स्वर्ण सिंह ने बताया कि उन्होंने प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को लेकर आयोजित छह दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में निशुल्क प्रशिक्षण लिया है। उन्होंने बताया कि इस खेती विधि के जनक पदम्श्री सुभाष पालेकर ने यह प्रशिक्षण दिया और इसमें प्रदेश के 800 से अधिक किसानों प्राकृतिक खेती विधि की बारिकियां सिखाई गई। उन्होंने बताया कि उनके खेतों और बगिचों में प्राकृतिक खेती विधि से तैयार किये गए मॉडल को देखने के लिए आस पास के किसान भी पहुंच रहे हैं, जिन्हें वे इस खेती विधि के बारे में जागरूक कर रहे हैं।

अनार में भी चला है प्रयोगः स्वर्ण सिंह ने बताया कि उन्होंने छह साल की कड़ी मेहनत से एक अनार का बगिचा तैयार किया है। जिससे उनके साल भर का खर्च निकलता है। उन्होंने बताया कि अभी पिछले वर्ष नार के 50 पौधों में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती विधि को अपनाया है। उन्होंने बताया कि एसपीएनएफ विधि में बताई गई रोगनाशी और कीटनाशक दवाइयां कारगर हैं और उनके अनार के पौधे स्वस्थ होने के साथ उनमें पैदावार भी अच्छी है। उन्होंने बताया कि अनार में सूंडियां और ब्लाल्इट के लिए स्थानिय वनस्पतियों से तैयार होने वाला दशपर्णी अर्क बहुत ही कारगर है। स्वर्ण सिंह बताते हैं कि इस खेती विधि के लिए देसी नस्ल की गाय का होना जरूरी है। इसलिए जहां वे अभी तक लोगों से 20 रूपये प्रतिलीटर के हिसाब से गोमूत्र और 10 रूपये प्रतिकिलो से गोबर खरीद रहे थे, इस खर्च से बचने के लिए देसी नस्ल की गाय को खरीदेंगे और भविष्य में इस खेती विधि से अनार और सब्जियों की खेती करेंगे।

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