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छोटे किसानों पर बेदखली का खतरा बरकरार

छोटे किसानों पर बेदखली का खतरा बरकरार

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शिमला। प्रदेश में सरकारी भूमि पर छोटे किसानों द्वारा किए गए अवैध कब्जों को लेकर अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। राज्य सरकार ने इसके लिए एक पॉलिसी बनाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक कोई पॉलिसी नहीं बन पाई है। सरकार ने इसके लिए एक हाईपावर कमेटी का भी गठन किया था। कमेटी ने एक बैठक भी की थी। इसमें यह किया था कि 10 बीघा से कम भूमि वाले किसानों को राहत दी जाएगी, लेकिन उससे आगे गाड़ी नहीं बढ़ पाई।

  • सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर अभी तक कोई राहत नहीं
  • कोई पॉलिसी नहीं बना पाई सरकार
  • अदालत से आदेश पास हुए, तो छोड़नी पड़ जाएगी जमीन

hpgराज्य सरकार ने विधानसभा में इस बाबत संकल्प प्रस्ताव भी पास किया था कि जिन किसानों को पास कम भूमि है या फिर कोई जमीन नहीं है उन्हें भूमि दी जाएगी। इसके साथ-साथ यदि किसी किसान ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया है, उसे नियमित करने के लेकर भी नीति बनाई जाएगी। लेकिन, अभी तक मामला इससे आगे नहीं बढ़ा है। इससे छोटे किसानों पर बेदखली का भी खतरा बना हुआ है।

यदि अदालत से इस बाबत कोई आदेश पास हो गए, तो छोटे किसानों को सरकारी भूमि छोड़नी पड़ जाएगी। अदालत ने अभी वन भूमि से अवैध कब्जे छुड़वाने को आदेश दिए हैं और इसके लिए वन विभाग के अफसरों को निजी तौर पर भी पार्टी बनाया है। सरकार द्वारा गठित हाईपावर कमेटी ने राज्य के तीनों मंडलायुक्तों से रिपोर्ट मांगी थी कि कितने कब्जाधारी ऐसे हैं जिनकी रोजी-रोटी कब्जाई गई सरकारी भूमि पर निर्भर है। मंडलायुक्तों से यह भी पूछा गया था कि कितने कब्जाधारी ऐसे हैं, जिनके पास कोई जमीन नहीं है। इसके साथ-साथ यह रिपोर्ट भी मांगी थी कि कितने कब्जाधारी ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी भूमि के साथ kaul-singhलगती सरकारी भूमि पर छिटपुट कब्जे किए हैं।

कमेटी ने तीनों मंडलायुक्तों से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी रिपोर्ट नहीं आई है। कमेटी ने यह सुझाव भी मांगे थे कि कैसे छोटे व भूमिहीन किसानों द्वारा किए गए अवैध कब्जों को नियमित किया जा सकता है। लेकिन, इस संबंध में भी कुछ नहीं हुआ है।

उधर, राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 10 बीघा से कम भूमि वाले अवैध कब्जाधारियों को राहत देने के फैसला किया है। इसके लिए सरकार ने एक पॉलिसी बनाने की बात कही है। उनका कहना था कि इस बाबत एक हाईपावर कमेटी बनाई गई है, लेकिन अभी तक मंडलायुक्तों से रिपोर्ट आनी बाकी है।

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