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रूठे इंद्र देव, आफत में किसान; बिलासपुर में पीली पड़ने लगी गेहूं

रूठे इंद्र देव, आफत में किसान; बिलासपुर में पीली पड़ने लगी गेहूं

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अब बारिश न होने का खामियाजा भुगतेंगे किसान,पीला रतुआ भी कहर बरपाने को तैयार

बिलासपुर। कम बारिश होने से बिलासपुर जिला में सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। मौसम विभाग के ज्यादातर पूर्वानुमान भी सही साबित नहीं हुए हैं। बहरहाल, तापमान में उतार-चढ़ाव का असर गेहूं की फसल पर पड़ा है और कई जगह पर फसल पीली पड़ गई है। अब उपयुक्त बारिश ने होने के कारण फसल को पीला रतुआ की चपेट में आने की संभावनाओं से भी नकारा नहीं जा सकता। हालांकि कृषि महकमे के विशेषज्ञ गेहूं की फसल पीली पड़ने के लिए कोहरा या फिर यूरिया इत्यादि की कमी को एक मुख्य कारण मान रहे हैं, लेकिन अगले 15 से 20 दिन में बारिश न होने पर फसल बर्बाद होने की संभावना से भी इंकार नहीं कर रहे हैं। ऐसे में बारिश न होने पर पीला रतुआ गेहूं की फसल को खा जाएगा। कृषि विभाग की माने तो जिला बिलासपुर के निचले क्षेत्र स्वारघाट खंड के बैहल, डोभा, बस्सी, गुरु का लाहौर, मजारी व जकातखाना, जबकि झंडूता खंड के बरठीं, भगतपुर, नघ्यार और घुमारवीं खंड के हटवाड़, बम्म व पंतेहड़ा तथा सदर खंड के दयोथ, जुखाला, छकोह, धारटटोह, पंजगाईं, दयोली व बरमाणा में इस रोग के फैलने की संभावना अधिक है।

वैसे भी मौसम की अनुकूलता के मद्देनजर गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग फैलने की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि तापमान में उतार-चढ़ाव इस रोग के फैलने के लिए अनुकूल होता है। बताया जा रहा है कि जिस गेहूं की बिजाई अक्तूबर, नवंबर व दिसंबर माह के पहले हफ्ते में की गई है, उसमें रोग के फैलने की ज्यादा संभावना है, क्योंकि रोग का प्रकोप अधिक ठंड और नमी वाले मौसम में उग्र होता है।  

गेहूं में दिखाई देती है पीले रंग की धारियां

शुरुआती दौर में पीला रतुआ रोग के लक्षण पीले रंग की धारियों के रूप मे पत्तियों पर दिखाई देते हैं। यदि यह रोग कल्ले निकलने की अवस्था में या इससे पहले आ जाए तो फसल को भारी क्षति भी पहुंच सकती है, साथ ही पीली धारियां मुख्यतः पत्तियों पर ही पाई जाती हैं, लेकिन रोग के अधिक प्रकोप की व्यापक दशा में पत्तियों के आवरण व तनों पर भी देखी जा सकती हैं। विभाग के विशेषज्ञ कहते हैं कि इस बाबत किसान जागरूक रहें तथा कहीं भी इस रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रोपीकोनाजोल (टिल्ट) एक मिलीलीटर दवाई का एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें, तो इस रोग के फैलने से फसल को बचाया जा सकता है।

यह दवाई कृषि विभाग के सभी विक्रय केंद्रों पर उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि विषयवाद विशेषज्ञ, कृषि विकास अधिकारी और कृषि प्रसार अधिकारी से संपर्क कर विस्तृत जानकारी हासिल की जा सकती है। उन्होंने किसानों को दवा का प्रयोग करने की सलाह दी है।

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