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Hamara Agenda : सूखे खेत…किसान बेबस…इंद्रदेव से आस

Hamara Agenda : सूखे खेत…किसान बेबस…इंद्रदेव से आस

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टीम। लंबे समये से बारिश के लिए तरस रहे हिमाचल प्रदेश को आज कुछ राहत के बादल दिखाई दिए हैं। इसका कारण भी साफ है, प्रदेश में पिछले करीब डेढ़ महीने से बारिश की एक बूंद भी नहीं गिरी है। जमीन सूख चुकी है, गेहूं की बुआई के लिए किसानों की पेशानी पर बल साफ दिखने लगी हैं। इस बार 5 अक्टूबर से अब तक राज्य में बारिश नहीं हुई है, हालांकि कुछ इलाकों में एक दो-बार हलकी बारिश हुई है। मौसम विभाग की मानें तो प्रदेश में अभी तक बारिश की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में लगातार शीतलहर का प्रकोप बढ़ने लगा है। आज सुबह से प्रदेश के अधिकांश इलाकों में बादल छाए हुए हैं, लेकिन अभी 25 नवंबर तक कहीं भी बारिश की कोई उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की उम्मीद है। इसके अलावा कुछ इलाकों में आज रात व कल से बारिश भी हो सकती है।
  • farmer-1जल्द नहीं हुई बारिश तो ज्यादा बीज बोना होगा
  • अभी मात्र 10 फीसद जमीन पर ही हो पाई बुआई
  • मौसम की बेरुखी से गड़बड़ा जाएगा रसोई का बजट

सूख चुकी है 80 प्रतिशत जमीन

मौसम की इस बेरुखी का सीधा असर रबी की फसल पर पड़ रहा है। अगर कुछ दिन यूं ही चलता रहा तो पैदावार पर खासा असर पड़ेगा। साथ ही आने वाले साल में रसोई का बजट भी गड़बड़ा जाएगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बारिश न होने से जमीन सूख चुकी है। बारिश होने के बाद भी किसानों को 10 से 15 प्रतिशत अधिक बीज बोना होगा तभी कुछ पैदावार हासिल हो पाएगी। हालांकि प्रदेश में सिंचाई सुविधा से जुड़ी कृषि योग्य भूमि में तो किसानों ने गेहूं की बुआई शुरू कर दी है, लेकिन चिंता की बात यह है कि सिंचाई योग्य भूमि प्रदेश के कुछ कृषि योग्य क्षेत्र का मात्र 20 प्रतिशत ही है।

farmer2अर्थव्यवस्था भी गड़बड़ाएगी

कुल 55.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले इस पहाड़ी राज्य में 10.4 प्रतिशत भूमि ही कृषि योग्य है। प्रदेश की लगभग 70 लाख आबादी में से कार्यशील जनसंख्या का लगभग 69 प्रतिशत कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। यानि कृषि ही हिमाचल प्रदेश का प्रमुख व्‍यवसाय है। यह राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में भी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। कृषि और उससे संबंधित क्षेत्र से होने वाली आय प्रदेश के कुल घरेलू उत्‍पाद का 22.1 प्रतिशत है। कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में से 9.79 लाख हेक्‍टेयर भूमि के स्‍वामी 9-14 लाख किसान हैं। इनमें से मंझोले और छोटे किसानों के पास ही कुल भूमि का 86.4 प्रतिशत भाग है।

farmer380 फीसद भूमि इंद्रदेव पर निर्भर

लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र वर्षा-सिंचित है और किसान इंद्र देवता पर ही निर्भर रहते हैं। राज्य में अधिकतर किसान खाद्यान्नों की पारंपरिक खेती में लगे हैं तथा सब्जियों और फलों जैसी लाभदायक फसलों की ओर ध्यान देने में सक्षम नहीं है। ऐसे में इस बार बारिश में हो रही देरी प्रदेश के लिए खाद्य संकट खड़ा कर सकती है। प्रदेश में कुल फसल उत्पादन का 91 प्रतिशत खाद्यान्न है। इनमें से 85 प्रतिशत धान्य फसलें हैं तथा पांच से सात प्रतिशत दलहन।

कुल उत्पादन का सात प्रतिशत सब्जियां व मसाले हैं तथा मात्र तीन प्रतिशत भाग में अखाद्य फसलों का उत्पादन होता है। सामान्यतः रबी की यह फसल अक्टूबर-नवंबर में बो दी जाती है और अप्रैल-मई में काटी जाती है। गेहूं लगभग सारे हिमाचल में बोई जाती है। प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्र के 20 से 40 प्रतिशत क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है। गेहूं का उत्पादन लगभग सभी जिलों में होती है। केवल लाहुल-स्पीति जिला में इसका उत्पादन नहीं होता है।

kangraकांगड़ा में बिगड़े हालात

आबादी और सिंचाई कूहलों से कृषि भूमि के लिहाज से प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में ही अब तक तकरीबन 50 फीसद कृषि योग्य भूमि में ही रबी की फसल की बुआई हो पाई है। जिला कांगड़ा में करीब 98 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की फसलें बोई जाती हैं, मगर बारिश न होने से 50 हजार हेक्टेयर भूमि में फसल नहीं बोई जा सकी है। जिला के कुछ क्षेत्रों में तो 90 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पर बिजाई हो चुकी है लेकिन कई इलाकों में तो महज 10 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पर ही रबी की फसलें बोई जा सकी हैं। लेकिन प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी किसानों ने मात्र 10-12 प्रतिशत भूमि पर ही रबी की फसल बोई है।

weatherसता सकता है खाद्य संकट

कांगडा़ के जिला कृषि अधिकारी एवं उपनिदेशक कृषि विभाग डॉ. देश राज का कहना है कि जिला में करीब 98 हजार हेक्टेयर पर रबी की फसल बीजी जाती है। इसमें से 93 हजार हेक्टेयर में गेहूं, करीब 3 हजार हेक्टयर में जौं और तकरीबन 1200 हेक्टयर में आलू की फसल बीजी जाती है। बारिश नहीं होने की वजह से आधे कृषि योग्य क्षेत्र में अभी तक बिजाई नहीं हो सकी है। इसका सीधा प्रभाव कम पैदावार के रूप में सामने आएगा।

उनका कहना है कि अभी तो 15 दिसंबर तक बिजाई हो सकती है लेकिन किसानों को अब खेतों में 10 फीसदी अधिक बीज डालना होगा क्योंकि सीडिंग की दर मौसम की बेरुखी से प्रभावित होगी। उन्होंने बताया कि 15 दिसंबर के बाद होने वाली बिजाई में किसानों को सामान्य से 20 फीसद अधिक बीज खेतों में डालना होगा। ताकि सही मात्रा में सीडिंग हो सके। विभाग किसानों को देरी से बीजे जाने वाले बीज बोने की सलाह दे रहा है और उचित मात्रा में यह बीज किसानों को उपलब्ध भी करवाया जाएगा।

wdपश्चिमी विक्षोभ से राहत की उम्मीद

आमतौर पर बरसात के बाद राज्य में बारिश कम ही होती है। राज्य में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने पर ही बारिश या बर्फबारी होती है। लेकिन अभी तक पश्चिमी विक्षोभ राज्य में सक्रिय नहीं हुआ है। हालांकि आज और कल पश्चिमी विक्षोभ कुछ सक्रिय होगा, लेकिन इसका असर ऊंचाई वाले इलाकों में ही होगा। इसके बाद 25 और 26 नवंबर को फिर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने का अनुमान है। इसका असर निचले व मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में होगा। ऐसे में किसानों को दिसंबर के पहले सप्ताह तक बारिश का इंतजार करना होगा।
मौसम विभाग के स्थानीय केंद्र निदेशक डॉ. मनमोहन सिंह के मुताबिक इस बार बारिश न होने से रबी की फसल की बुआई में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि इस बार राज्य में बरसात भी सामान्य से 27 फीसद कम हुई है। सिरमौर और चंबा जिले में बरसात कम रही है। इसके अलावा लाहुल-स्पीति और किन्नौर जिले में भी कम पानी बरसा है। आजकल हवा में नमी भी कम है। दिसंबर के पहले या फिर दूसरे सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ राहत की फुंहारे दे सकता है।

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