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Indian Technomac Company: करोड़ों के घोटाले में 4 साल बाद दर्ज हुई FIR

आबकारी एवं कराधान विभाग ने पांवटा क्षेत्र के माजरा थाने में  दर्ज करवाया मामला 

Indian Technomac Company: करोड़ों के घोटाले में 4 साल बाद दर्ज हुई FIR

पांवटा साहिब। बहुचर्चित इंडियन टेक्नोमेक कंपनी घोटाले में आखिरकार 4 साल बाद एफआईआर दर्ज हो ही गई। आबकारी एवं कराधान विभाग ने पांवटा क्षेत्र के माजरा थाने में कंपनी के संचालकों व मुख्य आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करवाया है। विभाग की शिकायत पर पुलिस ने धारा 420, 487, 468, 470, 471 व आईपीसी की धारा 34 के तहत मामला दर्ज किया है। लगभग 6000 करोड़ के इस घोटाले में इंडियन टेक्नोमेक कंपनी के सीएमडी राकेश कुमार शर्मा, डॉयरेक्टर एंड एक्वायर विनय शर्मा सहित डॉयरेक्टर रंजन मोहन एवं अश्वनी साहू को आरोपी बनाया गया है। उधर, आबकारी एवं कराधान विभाग के सहायक आयुक्त जीडी ठाकुर ने मामले की पुष्टि की है।  हैरानी इस बात की है कि घपले के प्रकाश में आने के 4 साल तक जिम्मेदार विभाग महज फाइलें उलट-पुलट करते रहे और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई।

विभाग व सरकार ने जांच करवाने के बजाय मूंद ली आंखें

प्रदेश में इतनी बड़ी वित्तीय घटना होने के बावजूद न तो सरकार और न ही जिम्मेदार विभागों ने इस मामले को उच्च स्तरीय जांच के लिए उठाया। सवाल यह खड़ा होता है कि इतने बड़े घपले को आखिर उच्चस्तरीय जांच के लायक ही नहीं समझा गया। न तो सीबीआई को इसकी जांच सौंपी गई  और न  ही प्रवर्तन निदेशालय के हवाले मामला किया गया। कंपनी पर आबकारी विभाग की लगभग 2175.51 करोड़ की देनदारी बताई गई है। इसके अलावा आयकर विभाग की 750 करोड़ की देनदारी एवं EPF विद्युत विभाग व श्रम विभाग सहित सैकड़ों करोड़ की देनदारियां बाकी हैं। अभी तक की जांच में हिमाचल के विभिन्न विभागों की लगभग 32 सौ करोड़ की देनदारियां ही सामने आई है। इसके इलावा कंपनी पर लगभग 23 सौ करोड़ की बैंकों की देनदारी अभी बताया है।

 फरार हो गए कंपनी के संचालक

 दरअसल कंपनी ने संचालन के शुरुआती दिनों से ही इस घोटाले का ताना-बाना बुन लिया था। पांवटा के माजरा थाने के तहत जगतपुर गांव में स्थित इंडियन टेक्नो में एक कंपनी ने 2008 में कार्य शुरू किया था और वर्ष 2009-10 में कंपनी द्वारा फाइल रिटर्न में महाघोटाले की शुरुआती सुगबुगाहट हो गई थी लेकिन विभाग ने उस समय कंपनी पर कोई शिकंजा नहीं कसा, जिसके चलते विभिन्न विभागों की देनदारियां बढ़ती गई और घोटाले ने 6000 करोड़ के महा घोटाले का रूप ले लिया। कंपनी के 2014 में घोटाला सामने आने के बाद राकेश शर्मा ढुलमुल सरकारी रवैया का लाभ उठाकर फरार हो गया है।  पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद इस मामले में भी कुछ रफ्तार पकड़ी है और अब मामला उच्चस्तरीय जांच के लिए ईडी को सौंपने की तैयारी की जा रही है इसी कड़ी में सरकार के सख्त निर्देशों के बाद विभाग ने मामले में पहली FIR दर्ज करवाई है।

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