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इस मंदिर में भक्तों के ऊपर फेंके जाते हैं आग के गोले, जानें कारण 

इस मंदिर में भक्तों के ऊपर फेंके जाते हैं आग के गोले, जानें कारण 

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नई दिल्ली। आपने अभी तक दुनिया के कई मंदिरों (Temple) और उनके अजीबो- गरीब रिवाजों (Custom) के बारे में सुना होगा लेकिन जिस मामले के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं उस मंदिर में भक्तों पर आग के गोले बरसाए जाते हैं। इस मंदिर में एक परंपरा निभाई जाती है जिसके चलते ऐसा किया जाता है।  हम आज आपको इस मंदिर में निभाई जाने वाली इस परंपरा के पीछे का कारण बता जा रहे हैं।


 

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वाकिया मंगलोर के कैथल में देवी दुर्गा परमेश्‍वरी मंदिर में ऐसा किया जाता है। बता दें कि यह एक परंपरा है, जिसे उत्‍सव के रूप में 8 दिनों तक मनाया जाता है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि अग्नि केलि नाम की यह परंपरा सदियों (Centuries) से चली आ रही है। यह परंपरा दो गांव आतुर और कलत्तुर के लोगों के बीच होती है। मंदिर में सबसे पहले देवी की शोभा यात्रा निकाली जाती है, जिसके बाद सभी तालाब में डुबकी लगाते हैं। फिर अलग-अलग दल बना लेते हैं। इन सब के बाद अपने-अपने हाथों में नारियल की छाल से बनी मशाल लेकर एक दूसरे के विरोध में खड़े हो जाते हैं। फिर मशालों जलाकर इस परंपरा  को निभाया जाता है। यह खेल करीब 15 मिनट तक चलता है। एक शख्स को सिर्फ पांच बार जलती मशाल फेंक सकता है।

मान्यता है कि अग्नि केलि परंपरा में वह व्यक्ति जो आर्थिक या फिर शारीरिक रूप से कमजोर हो शामिल हो जाए तो मां भवानी उसके सारे कष्‍ट दूर कर देती हैं।

 

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