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110 वर्ष पहले इस वैज्ञानिक ने बनाया गया था मास्क, यहां पढ़े क्या है इसके पीछे की स्टोरी

चीन में फैली बीमारी को नियंत्रित करने के लिए

110 वर्ष पहले इस वैज्ञानिक ने बनाया गया था मास्क, यहां पढ़े क्या है इसके पीछे की स्टोरी

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देश व दुनिया में लोग इस समय कोरोना संक्रमण ( Corona infection)से जूझ रहे हैं। एक तरफ तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामले डरा रहे हैं तो कोरोना वैक्सीनेशन ( Corona vaccination)के लिए लोग आगे भी आ रहे हैं। देश में इस समय तेजी से टीकाकरण ( Vaccination) अभियान चला हुआ है। इस संक्रमण से बचाव के लिए तीन अहम कदम उठाने की जरूरत हम सभी हो है। इसमें सबसे पहले है मास्क पहनना , सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और साफ- सफाई रखना। मास्क पहनने की बात आती है कई लोग मास्क तो पहनते हैं पर उसे नाक के नीचे या फिर मुंह से भी नीचे सरका लेते हैं, ऐसे में मास्क पहनने का क्या फायदा। कुछ लोग मास्क ना पहनने के लिए बहाने बनाते हैं। क्या आप ने सोचा है कि मास्क सबसे पहले कहां पहना गया होगा और कब पहना होगा। जरा सोचिए .. चलिए हम आप को बताते हैं।


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103 वर्ष पहले दुनिया में जब स्पेनिश फ्लू ( Spanish flu) फैला था तो उस समय भी फेस मास्क ( Face mask) का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन फेस मास्क का इजाद तो इससे भी पहले हो चुका है और दिलचस्प तो यह है कि कोरोना सबसे पहले चीन( China) में फैला तो वहीं पर फेस मास्क सबसे पहले पहना गया था। करीब 110 वर्ष पहले वहां पर एक वैज्ञानिक ने मास्क ने तैयार किया था और उस वैज्ञानिक का नाम था वी-लीन तेह। वी-लीन तेह का जन्म 1879 में मलेशिया के पेनांग में हुआ और इनकी शिक्षा ब्रिटेन में हुई। वी-लीन तेह वर्ष 1910 में उत्तर पूर्वी चीन में फैली ब्यूबोनिक प्लेग ( Bubonic plague) को काबू करने के लिए महामारी विशेषज्ञ के तौर पर काम करने के लिए वहां गए थे। इस दौरान वी-लीन तेह ने अपना सबसे पहला पोस्टमार्टम किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह बीमारी किस बैक्टीरिया से और कैसे फैली।

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उन्होंने पाया की यह महामारी सांस के ड्रॉप्लेट ( Drawplate)के जरिए फैल सकती है, जैसे कोरोना फैलता है। ऐसे में उन्होंने खुद कॉटन व कपड़े की लेयर्स जोड़ कर फेस मास्क डिजाइन किया। उन्होंने डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मी समेत अन्य लोगों को भी मास्क पहनने के लिए प्रेरित किया ताकि महामारी को नियंत्रित किया जा सके। उस समय फेस मास्क पहनने के लिए उन्होंने प्रेरित तो किया लेकिन उनकी बात लोग मान नहीं रहे थे। मास्क ना पहनने से जब एक फ्रेंच स्टाफ की मौत हो गई तो स्वास्थ्य कर्मियों को इसकी अहमिय़त समझ में आई और उन्होंने मास्क पहनना शुरु कर दिया आज के दौर में भी लोग इसे नजरअंदाज कर रहे हैं जो सही नहीं है। इसलिए कोरोना से बचाने के लिए फेस मास्क पहनना बहुत जरूरी है।

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