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श्रद्धालुओं के लिए तीर्थ पांच पवित्र सरोवर 

श्रद्धालुओं के लिए तीर्थ पांच पवित्र सरोवर 

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हिंदू धर्म में पांच सरोवरों को अत्यंत पवित्र माना गया है अपनी धार्मिक विशिष्टता के कारण ये सभी सरोवर श्रद्धालुओं के लिए तीर्थ बन गए हैं। इन सरोवरों का आध्‍यात्‍मिक दृष्टि से काफी महत्‍व है। कहते हैं कि इनमें स्नान करने से पाप से मुक्ति मिल जाती है। हज़ारों की संख्या में हर साल श्रद्धालु इन पवित्र सरोवरों में स्नान करने के लिए जाते हैं …
कैलाश मानसरोवर : बस यही एक सरोवर है, जो अपनी पवित्र अवस्था में आज भी मौजूद है। कैलाश मानसरोवर को सरोवरों में प्रथम पायदान पर रखा जाता है। इसे देवताओं की झील कहा जाता है। यह हिमालय के केंद्र में है। इसे शिव का धाम माना जाता है। कहा जाता है कि मानसरोवर के पास स्थित कैलाश पर्वत पर भगवान शिव साक्षात विराजमान हैं। मानसरोवर लगभग 320 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके उत्तर में कैलाश पर्वत तथा पश्चिम में राक्षसताल है। इसके दक्षिण में गुरला पर्वतमाला और गुरला शिखर है। यह समुद्र तल से लगभग 4,556 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
नारायण सरोवर : ‘नारायण सरोवर’ का अर्थ है- ‘विष्णु का सरोवर’।  गुजरात के कच्छ  जिले की लखपत तहसील में नारायण सरोवर स्थित है।यहां सिंधु नदी का सागर से संगम होता है। इसी संगम के तट पर पवित्र नारायण सरोवर है और यहीं भगवान आदिनारायण का प्राचीन भव्य मंदिर है। नारायण सरोवर में कार्तिक पूर्णिमा से 3 दिन का भव्य मेला आयोजित होता है। इसमें उत्तर भारत के सभी संप्रदायों के साधु-संन्यासी और अन्य भक्त शामिल होते हैं।यहां श्रद्धालु अपने पितरों का श्राद्ध भी करते हैं।
पुष्कर सरोवर : राजस्थान में अजमेर शहर से 14 किलोमीटर दूर पुष्कर झील है। यहां ब्रह्माजी का एकमात्र मंदिर बना है। यहां विश्व का प्रसिद्ध पुष्कर मेला लगता है, जहां देश-विदेश से लोग आते हैं। पुष्कर की गणना पंच तीर्थों में भी की गई है। महाभारत के वन पर्व के अनुसार योगिराज श्रीकृष्ण ने पुष्कर में दीर्घकाल तक तपस्या की थी। श्रीराम ने भी अपने पिता दशरथ का श्राद्ध पुष्कर में किया था।
पुष्कर सरोवर 3 हैं- ज्येष्ठ (प्रधान) पुष्कर, मध्य (बूढ़ा) पुष्कर और कनिष्ठ पुष्कर। ज्येष्ठ पुष्कर के देवता ब्रह्माजी, मध्य पुष्कर के देवता भगवान विष्णु और कनिष्ठ पुष्कर के देवता रुद्र हैं।
पंपा सरोवर : मैसूर के पास स्थित पंपा सरोवर एक ऐतिहासिक स्थल है। हंपी के निकट बसे हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायणकालीन किष्किंधा माना जाता है। तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मुख्य मार्ग से कुछ हटकर बाईं ओर पश्चिम दिशा में पंपा सरोवर स्थित है। पंपा सरोवर के निकट पश्चिम में पर्वत के ऊपर कई जीर्ण-शीर्ण मंदिर दिखाई पड़ते हैं। यहीं पर एक पर्वत है, जहां एक गुफा है जिससे शबरी की गुफा कहा जाता है। माना जाता है कि वास्तव में रामायण में वर्णित विशाल पंपा सरोवर यही है, जो आजकल हास्पेट नामक कस्बे में स्थित है।
बिंदु सरोवर : बिंदु सरोवरअहमदाबाद (गुजरात) से 130 किलोमीटर उत्तर में अवस्थित ऐतिहासिक सिद्धपुर में स्थित है। इस स्थल का वर्णन ऋग्वेद की ऋचाओं में मिलता है जिसमें इसे सरस्वती और गंगा के मध्य अवस्थित बताया गया है। संभवतः सरस्वती और गंगा की अन्य छोटी धाराएं पश्चिम की ओर निकल गई होंगी। इस सरोवर का उल्लेख रामायण और महाभारत में मिलता है। 

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