दूर्वा गणपति व्रत : भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने दूर होंगे कष्ट

बुधवार को गणेशजी की उपासना से व्यक्ति का सुख-सौभाग्य बढ़ता है

दूर्वा गणपति व्रत : भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने दूर होंगे कष्ट

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मंत्र के साथ श्री गणेश को दूर्वा चढ़ाने से जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। साथ ही श्रीगणेश अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उन्हें सुखी जीवन और संपन्नता का आशीर्वाद प्रदान करते है।

दूर्वा गणपति व्रत में दूर्वा का बेहद खास महत्व है। दूर्वा गणपति व्रत विघ्नहर्ता गणेश की आराधना के लिए बहुत अधिक मंगलकारी माना जाता है। यह व्रत सावन शुक्ल चतुर्थी को पड़ता है। इसलिए इसे वरद चौथ भी कहा जाता है। आज दूर्वा गणपति व्रत है।

इस दिन भगवान गणपति के भक्त विभिन्न प्रकार से उनकी आराधना करते हैं।

  • तंत्र उपासना में 2, 3 या 5 दुर्वा अर्पण की जाती है। यज्ञ कार्य में 3 दूर्वा का प्रयोग आणव, कार्मण व मायिक रूपी अवगुणों को भस्म करने हेतु होता है। दूर्वा वह है, जो गणेश के दूरस्थ पवित्रकों को पास लाती है। भगवान गणेश को अर्पित की जाने वाली दूर्वा कोमल होनी चाहिए।
  • दूर्वा की पत्तियां विषम संख्या में (3, 5, 7) अर्पित करनी चाहिए। इसके अलावा चांदनी, चमेली या पारिजात के फूलों की माला बनाकर पहनाने से भी गणेश जी प्रसन्न होते हैं। गणपति का वर्ण लाल है, उनकी पूजा में लाल वस्त्र, लाल फूल व रक्तचंदन का प्रयोग किया जाता है।
  • पुराणों में गणेशजी की भक्ति शनि सहित सारे ग्रहदोष दूर करने वाली भी बताई गई हैं। हर बुधवार को गणेशजी की उपासना से व्यक्ति का सुख-सौभाग्य बढ़ता है और सभी तरह की रुकावटें दूर होती हैं।

    • पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष के अनुसार दूर्वा केतु ग्रह को संबोधित करती है। गणपति धूम्रवर्ण ग्रह केतु के देवता है और केतु ग्रह से पीड़ित जातकों को गणेशजी को दूर्वा चढ़ाना शुभ माना जाता है।
    • दूर्वा बुधवार के दिन शाम सूर्यास्त पूर्व गणेश जी को अर्पित करना अच्छा माना जाता है। इस प्रयोग को करने से भगवान गणेश आपके जीवन को संकल्प के साथ सुख-सफलता व शांति तथा ऊर्जा से भर देते है।”त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय। नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्” इस मंत्र का जाप भी कर सकते है।

भगवान गणेश के कुछ खास दिनों में जैसे बुधवार, विनायकी चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी और श्रीगणेश चतुर्थी, गणेश जन्मो‍त्सव के दिन उन्हें विशेषतौर पर दूर्वा चढ़ाकर उनका पूजन करना चाहिए, ताकि हमारे जीवन के समस्त कष्टों का निवारण शीघ्र हो सके। अपने जीवन की सभी संकटों से मुक्ति के लिए इस दिन शिव परिवार का पूजन करना लाभदायी माना गया है। इस दिन श्रीगणेश का पूजन करते समय निम्न मंत्र बोलकर गणेश जी को दूर्वा अर्पण करना चाहिए।कोई भी नकारात्मक शक्ति घर में प्रवेश नहीं कर पाती

गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।

नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।

धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।

गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम्।।

इन आसान और सरल उपायों से होंगें परिवार और व्यक्ति के दुःख दूर :

  • बुधवार के दिन घर में सफेद रंग के गणपति की स्थापना करने से समस्त प्रकार की तंत्र शक्ति का नाश होता है।
  • धन प्राप्ति के लिए बुधवार के दिन श्री गणेश को घी और गुड़ का भोग लगाएं। थोड़ी देर बाद घी व गुड़ गाय को खिला दें। ये उपाय करने से धन संबंधी समस्या का निदान हो जाता है।
  • परिवार में कलह कलेश हो तो बुधवार के दिन दूर्वा के गणेश जी की प्रतिकात्मक मूर्ति बनवाएं। इसे अपने घर के देवालय में स्थापित करें और प्रतिदिन इसकी विधि-विधान से पूजा करें।
  • घर के मुख्य दरवाजे पर गणेशजी की प्रतिमा लगाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कोई भी नकारात्मक शक्ति घर में प्रवेश नहीं कर पाती है।
  • भगवान गणेश विघ्नहर्ता माने जाते हैं। किसी भी कार्य के करने से पहले सर्वप्रथम भगवान गणेश का नाम लिया जाता है, यहां तक शुरुआत करने को ही श्रीगणेश कहा जाता है।
  • गणपति की महिमा को सभी जानते हैं और यह भी जानते हैं कि वे माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं। लेकिन बहुत कम लोग हैं जो इससे आगे गणेश के परिवार के बारे में जानते हैं,
  • उनकी पत्नी और बच्चों के बारे में जानते हैं। जी हां भगवान श्री गणेश की पत्नियां भी हुई और बच्चे भी। बुधवार के दिन इनके परिवार की पूजा की जाये तो भगवान श्री गणेश की कृपा अवश्य मिलती है।

कैसे करें गणेश परिवार की पूजा

भगवान गणेश जहां विघ्नहर्ता हैं वहीं रिद्धि और सिद्धि से विवेक और समृद्धि मिलती है। शुभ और लाभ घर में सुख सौभाग्य लाते हैं और समृद्धि को स्थायी और सुरक्षित बनाते हैं।सुख सौभाग्य की चाहत पूरी करने के लिये बुधवार को गणेश जी के पूजन के साथ ऋद्धि-सिद्धि व लाभ-क्षेम की पूजा भी विशेष मंत्रोच्चरण से करना शुभ माना जाता है। इसके लिये सुबह या शाम को स्नानादि के पश्चात ऋद्धि-सिद्धि सहित गणेश जी की मूर्ति को स्वच्छ या पवित्र जल से स्नान करवायें, लाभ-क्षेम के स्वरुप दो स्वस्तिक बनाएं, गणेश जी व परिवार को केसरिया, चंदन, सिंदूर, अक्षत और दूर्वा अर्पित कर सकते हैं।

गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने से गणेशजी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

 

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