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J & K: मुठभेड़ में पत्थरबाजों से निपटने को ARMY ने बनाई स्मार्ट रणनीति

J & K: मुठभेड़ में पत्थरबाजों से निपटने को ARMY ने बनाई स्मार्ट रणनीति

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 नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी लगातार अपने तरीकों और योजनाओं में बदलाव ला रहे हैं। आबादी वाले इलाकों में छिपना और सेना व सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ की स्थिति में स्थानीय आबादी के एक हिस्से द्वारा पत्थर फिंकवा कर सेना का ध्यान बांटने का तरीका आतंकियों की नई रणनीति का हिस्सा है। स्थानीय आबादी के शामिल हो जाने के कारण सेना के सामने दोहरी चुनौती पैदा हो जाती है। उसे एक ही साथ आतंकियों और लोगों के साथ निपटना पड़ता है। जाहिर है कि दोनों तरीके एक जैसे नहीं हो सकते हैं। इन नए तरीके से आतंकवादियों को काफी सहूलियत मिल रही है। जंगलों या फिर सुनसान इलाकों में एकाएक सुरक्षाबलों के सामने पड़ जाने की चुनौती से भी वह बच रहे हैं। जानकारी के अनुसार एक बख्तरबंद गाड़ी के अंदर साझा कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। इसे मुठभेड़ की जगह पर तैनात किया जाएगा। कंट्रोल रूम यह सुनिश्चित करेगा कि मुठभेड़ से जुड़े जवानों और सुरक्षाबलों के बीच बेहतर सामंजस्य हो। इसके बाद डिप्टी कमिश्नरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उस जगह पर आम लोग जमा न हो पाएं।


  •  बख्तरबंद गाड़ी के अंदर बनाया जाएगा साझा कंट्रोल रूम 
  • आतंकियों की मदद करने वालों की पुलिस करेगी पहचान 

आतंकियों की मदद करने वालों की पुलिस पहचान करेगी और पत्थर फेंकने वालों की भी सूची बनाई जाएगी। पुलिस इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी। एक सूत्र ने बताया कि इससे पहले ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने की घटनाएं हुआ करती थीं। पिछले साल से यह चलन बदल गया। बुरहान वानी की मौत के बाद से लोग मुठभेड़ की जगह सुरक्षा बलों द्वारा बनाए गए घेरे को तोड़ने की कोशिश करते हैं और आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शामिल जवानों पर हमला करते हैं। जवानों का ध्यान बंटने के कारण आतंकियों को हमला करने और भागने का मौका मिल जाता है। सूत्र ने बताया कि पिछले एक साल में पत्थर फेंकने वालों की मदद के कारण करीब 25 आतंकवादी मुठभेड़ की जगह से फरार होने में कामयाब हुए हैं।

 ऐसी बात नहीं है कि पहले की स्थितियां सेना के लिए आसान रही हों, लेकिन इतना जरूर है कि अब खतरा बढ़ गया है। इन बदली हुई परिस्थितियों के कारण आतंकियों का घेराव कर उन्हें भागने से रोकना या फिर आतंकी कार्रवाई को विफल करना अब सेना के लिए ज्यादा मुश्किल और खतरनाक हो गया है। ज्यादातर मामलों में अब आतंकवादी आबादी वाले इलाकों में छिप जाते हैं। ऐसे में उनके साथ मुठभेड़ सेना के लिए बहुत मुश्किल साबित हो रहा है। सेना और सुरक्षाबलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि उन्हें आम लोगों को इस पूरी कार्रवाई से अलग रखना होता है। किसी भी आम नागरिक को गोली ना लगे, इसका ध्यान रखते हुए जवानों के बेहद संभलकर गोली चलानी पड़ती है। दूसरी तरफ, आतंकवादी लोगों के घरों में छिपकर आम नागरिकों को अपनी ढाल बनाते हैं। इस रणनीति के तहत आतंकियों के लिए जवानों पर घात लगाना ज्यादा आसान होता है। यही कारण है कि पिछले कुछ समय में हुए मुठभेड़ों के दौरान कई जवान हताहत हुए हैं।

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