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मृत्यु का पूर्वाभास

मृत्यु का पूर्वाभास

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हमारे ही बीच रहने वाले कई लोगों को अपनी मृत्यु का आभास हो जाता है । कई तो ऐसे भी हुए हैं, जिन्होंने अपनी मृत्यु की तारीख और समय तक बता दिया था। परंतु मृत्यु के आसपास होने वाले अनुभव बड़े विचित्र हैं इनका स्रोत क्या है यह भी नहीं समझा जा सका है। 2011 का साल था, इंग्लैंड में 57 साल का एक व्यक्ति काम के दौरान अचानक बेहोश होकर गिर गया और उन्हें साउथैंपटन के सरकारी अस्पताल में भरती कराया गया। वहां इलाज के दौरान ही उनकी क्लीनिकल मौत हो गई।

for-web-1 उन्हें बस इतना याद था कि किसी ने कहा -मरीज को झटके दो। तभी उन्होंने देखा, एक महिला उनका हाथ पकड़कर छत के रास्ते बाहर लेजाना चाहती है । उन्हें लगा किवह उन्हें जानती है और वे उसपर भरोसा कर सकते हैं। वे अपने बेजान शरीर को छोड़कर उसके साथ हो लिए। अगले ही पल उन्होंने मुड़कर देखा उनका शरीर पड़ा था । वहां नर्स और डाक्टर थे । वे मुड़कर वापस अपने शरीर में आ गए।मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि मृत्यु के समय मानसिक अनुभव का दायरा विस्तृत है और इसका अतीत के अनुभव से नाता है। अक्सर पुनः जीवित होने वालों ने बताया कि उन्होंने जानवरो,पौधों ,चमकीली रोशनी,हिंसा ,उत्पीड़न जैसे दृश्य देखे।

for-web-4अक्सर पुनः जीवित होने वालों ने बताया कि उन्होंने जानवरों,पौधों ,चमकीली रोशनी,हिंसा ,उत्पीड़न जैसे दृश्य देखे। कोई खुद को आग में जलता हुआ देखता है,कोई गहरे पानी में जाता हुआ देखता है और कुछ को अपने परिजन भी दिखाई दिए।धारणा यही है कि मृत्यु के बाद भी आत्माएं दूसरे लोकों में जाकर भी आध्यात्मिक उन्नति के प्रयत्न में रहती हैं। जबतक नए जीवन की प्राप्ति नहीं होती तबतक उनका प्रयत्न चलता रहता है।

for-web-3आत्माएं इस लोक के लोगों को भी सूक्ष्म संकेत देती हैं। यह अलग बात है कि उन सूक्ष्म संकेतों को लोग पकड़ नहीं पाते। गीता में कहा गया है कि आत्मा का न जन्म होता है और न मृत्यु होती है। यह तो नित्य शाश्वत और पुरातन है मरना -जीना तो शरीर का धर्म है। शरीर का नाश हो जाने पर भी आत्मा की मौत नहीं होती। कितने ही लोगों को अपनी मृत्यु का स्पष्ट पूर्वाभास हो जाता है। वे अक्सर अपने उनपरिजनों से मिलने जाने की बात करने लगते हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। वे यह भी कहते हैं कि उन्हें अगले मुकाम पर जाना है। और वे इसी तरह चले भी जाते हैं।

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