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पेंच : सड़क निर्माण में Forest Clearance की लंगड़ी

पेंच : सड़क निर्माण में Forest Clearance की लंगड़ी

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शिमला। प्रदेश में सड़क निर्माण में फारेस्ट क्लीयरेंस सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। फारेस्ट क्लीयरेंस न मिलने से कई सड़कों का कार्य रुका पड़ा है और इसके चलते ग्रामीण सड़कों के कार्य अधर में लटके हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बन रही ऐसी सड़कें सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।


  • क्लीयरेंस न मिलने से 24 सड़कों का काम लटका
  • विधायक प्राथमिकता बैठकों में भी उठा था मुद्दा

प्राप्त जानकारी के मुताबिक पीएमजीएसवाई के तहत बनने वाली दो दर्जन सड़कें फारेस्ट क्लीयरेंस न मिलने के कारण अधर में लटकी हैं। इनमें से सबसे ज्यादा सड़कें पीडब्ल्यूडी के मंडी और डलहौजी सर्कल की हैं। राज्य के ग्रामीण इलाकों में अधिकतर सड़कें पीएमजीएसवाई के तहत ही बन रही हैं।


कई सड़कें जंगल के बीच से निकलनी हैं और कुछ सड़कें वन भूमि से निकलनी हैं। इसके लिए विभाग को उन सभी सड़कों की एफसीए क्लीयरेंस लेनी पड़ती है और सड़क मार्ग में आने वाले पेड़ों के एवज में एनपीवी भी जमा करवाना होता है, लेकिन विभाग को एफसीए क्लीयरेंस लेने में ही लंबा समय लग रहा है। इस कारण सड़कों का कार्य भी थम गया है। पिछले दिनों यहां विधायक प्राथमिकता की बैठकों में भी यह मुद्दा गूंजा था और कई विधायकों ने एफसीए क्लीयरेंस न मिलने के कारण सड़क कार्य लटकने की बात कही थी। उन्होंने संबंधित विभाग से एफसीए क्लीयरेंस में तेजी लाने की मांग की थी। विधायकों द्वारा इस मामले को उठाने के बाद सीएम वीरभद्र सिंह ने अधिकारियों को फारेस्ट क्लीयरेंस के मामले तेजी से सुलझाने का आदेश दिया। सीएम के आदेशों से विधायकों को भी उम्मीद जगी कि अब शायद सड़क निर्माण कार्य में तेजी आएगी।

फारेस्ट क्लीयरेंस न मिलने से मंडी और चंबा जिलों में भी इस योजना के तहत सड़कें अधर में लटकी हैं। पीएमजीएसवाई के तहत इस समय दो दर्जन सड़कें फॉरेस्ट क्लीयरेंस न मिलने के कारण अधर में हैं। इनमें से 12 सड़कें  तो मंडी सर्कल की हैं, जबकि डलहौजी सर्कल की 9 सड़कें इसमें शामिल हैं। रामपुर सर्कल की दो और जोगिंद्रनगर सर्कल में एक सड़क फॉरेस्ट क्लीयरेंस का इंतजार कर रही है। बताते हैं कि कुछ सड़कें तो पिछले कई वर्षों से लटकी हैं। अब सीएम के आदेश के बाद अफसर भी हरकत में आए हैं और उन्होंने फारेस्ट क्लीयरेंस के मामलों की रिपोर्ट संबंधित क्षेत्रों से मांगी है और उनकी कमियों को दूर करने में वे जुट गए हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इनकी क्लीयरेंस मिलेगी और कई गांवों के लोगों का सड़क के गांव में पहुंचने का सपना पूरा होगा। 

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