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जेएनयू के पूर्व कुलपति असीस दत्ता बोले- हमसे सीवी मांगना नोबेल वापस लेने जैसा

जेएनयू के पूर्व कुलपति असीस दत्ता बोले- हमसे सीवी मांगना नोबेल वापस लेने जैसा

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नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) (JNU) के पूर्व कुलपति असीस दत्ता (Former Vice Chancellor Asis Dutta) ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि प्रोफेसर एमेरिटस से शैक्षणिक और कार्य अनुभव मांगना (seeking CV) वैसा है जैसे उचित काम नहीं हो रहा यह सोचकर एक या दो दशक बाद नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) वापस ले लेना। बता दें कि दत्ता उन 12 प्रोफेसर एमेरिटस में से हैं जिनसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीवी मांगा है। जिसके बाद से विश्वविद्यालय शिक्षक संघ सहित कई धड़े इस फैसले के विरोध में उतार आए हैं।

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दत्ता ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने रेक्टर से लेकर उपकुलपति तक के पदों पर दशकों अपनी सेवाएं दीं और प्रोफेसर एमिरेटस के पद पर रहते विश्वविद्यालय से कुछ नहीं चाहते। जेएनयू में उनका कोई कार्यालय नहीं है और वह कोई भत्ता नहीं लेते। उन्होंने विश्वविद्यालय (university) के रजिस्ट्रार की ओर से सीवी की मांग किए जाने पर 22 जुलाई को दिए जवाब में भी इसका उल्लेख किया है। पूर्व कुलपति ने आगे कहा कि मैं विश्वविद्यालय शिक्षकों और छात्रों से मिलने और विज्ञान पर चर्चा करने जाता हूं जो मेरे जीवन की पूंजी है। काम को लेकर उनके नोबेल पुरस्कार विजेताओं और उनके विश्वविद्यालयों सहित दुनिया के बेहतरीन वैज्ञानिकों से संपर्क हैं। सेवानिवृत्ति से पहले जो सुविधाएं मिलती थी उसे मैं जेएनयू को वापस कर चुका हूं।


उन्होंने बताया कि इस वजह से मूल्यांकन की यह प्रक्रिया उन पर लागू नहीं होती। वह उस स्थिति में नहीं जाना चाहते हैं जहां सम्मानित वैज्ञानिक से सम्मान कायम रखने के लिए लगातार सबूत मांगे जाते हैं। यह वैसे ही है जैसे दशक या दो दशक बाद उचित काम नहीं करने पर नोबेल पुरस्कार विजेता से उसका सम्मान वापस लेना। इससे पहले सोमवार को विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार ने बयान में कहा कि दत्ता सहित 11 अन्य से शैक्षणिक और कार्य अनुभव बताने को कहा गया है। किसी प्रोफेसर एमिरेट को निशाना नहीं बनाया गया है और इस संबंध में सभी आरोप बेबुनियाद हैं। विश्वविद्यालय केवल नियमों का अनुपालन कर रहा है।

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