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हादसा नहीं हत्या है ये… अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते चार मासूमों की झुलस कर मौत

भोपाल के सबसे बड़े अस्पताल में अग्निकांड में चार बच्चों की मौत

हादसा नहीं हत्या है ये… अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते चार मासूमों की झुलस कर मौत

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भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) से दुखद खबर सामने आई है। भोपाल के हमीदिया कैम्पस में बने कमला नेहरू गैस राहत अस्पताल में आग लगने के चलते चार बच्चों की मौत हुई है। जबकि, घटना के वक्त बच्चों को बचाते हुए तीन नर्स और एक वार्ड बॉय के बेहोश होने की बात भी सामने आई है। हादसा सोमवार रात का बताया जा रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया कैम्पस में बने कमला नेहरू गैस राहत हास्पिटल में सोमवार देर रात आग लग गई थी। आग अस्पताल के तीसरी मंजिल के बच्चा वार्ड में लगी थी। उस समय वार्ड में करीब 40 बच्चे इलाजरत थे। वहीं, हादसे का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। बताया जाता है कि शॉर्ट सर्किट के चलते लगी आग पीडियाट्रिक वेंटिलेटर तक पहुंच गई। फिर ये आग उस वॉर्मर तक पहुंच गई, जिसमें बच्चों को रखा गया था। जिस कारण बच्चो की मौत हो गई।

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सीएम ने दिए जांच के आदेश 

सीएम शिवराज सिंह चौहान (Cm Shivraj Singh Chouhan) ने हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में आग की घटना दुखद है। घटना की जांच के निर्देश दिए गए हैं। ये जांच एडिशनल चीफ सेक्रेटरी लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मोहम्मद सुलेमान करेंगे। घटना पर मेरी लगातार नजर है।

घटना के वक्त तीसरी मंजिल पर 127 बच्चे थे भर्ती

वहीं, मामले पर विस्तृत जानकारी देते हुए शिक्षामंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि 4 बच्चों की मौत हुई है, जबकि 36 को रेस्क्यू कर लिया गया। नवजातों को बचाते समय 3 नर्स और एक वार्ड बॉय भी बेहोश हो गए थे। जिस वक्त आग लगी, तब इस थर्ड फ्लोर पर 127 बच्चे अलग-अलग वार्डों में भर्ती थे। हादसे के बाद 6 बच्चों को जेपी अस्पताल शिफ्ट करवाया है। रात साढ़े 12 बजे फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम ने आग पर काबू पाया।

लापरवाही के चलते गई बच्चों की जान

अब जो जानकारी समाने आ रही है, उससे अस्पताल प्रबंधन पर कई सवाल उठने शुरू हो गए हैं। बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर मिलाकर आठ मंजिल के कमला नेहरू अस्पताल में आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं थे। फायरकर्मियों ने अस्पताल में लगे ऑटोमेटिक हाईड्रेंट को देखा तो वो खराब पड़ा था। हर फ्लोर पर फायर एक्सटिंग्विशर तो थे लेकिन काम नहीं कर रहे थे। इधर, मंगलवार सुबह भी परिजन हंगामा कर रहे हैं।

उनका कहना है कि बच्चों का पता नहीं चल रहा है। वहीं, घटना को लेकर फायर ऑफिसर रामेश्वर नील ने कहा कि हमीदिया अस्पताल ने फायर NOC ली थी, लेकिन कमला नेहरू अस्पताल ने 15 साल से NOC लेना भी जरूरी नहीं समझा और बिल्डिंग के निर्माण के समय लगे सिस्टम को चालू भी नहीं किया। वहीं, बताया जाता है कि अग्निकांड की घटना बीते 7 अक्टूबर को भी सामने आ चुकी है। 7 अक्टूबर को भी नई बिल्डिंग में दूसरे तल पर ठेकेदार के स्टोर रूम में आग लग गई थी। फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियों ने एक घंटे में इस पर काबू पाया था। तब ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था।

शिफ्टिंग से पहले हुआ हादसा 

बताया जाता है कि जिस चिल्ड्रन वार्ड में आग लगी है, उसे नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाना था। अफरा-तफरी के बीच नवजात बच्चों को संभालना डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन चिंतित परिजनों को समझाना भी मुश्किल काम था। पुलिस जवान और फायरकर्मी बेकाबू परिजनों को संभालने में लगे थे। यहां परिजन जिस वार्ड में बच्चों को रखा था, उसमें घुसने के लिए दरवाजे तोड़ने पर आमादा थे।

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