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Freedom Fighter को नहीं मिला उसका हक, अब वीरांगना लड़ रही लड़ाई

Freedom Fighter को नहीं मिला उसका हक, अब वीरांगना लड़ रही लड़ाई

Freedom Fighter: रेवाड़ी। आजादी के इतने लंबे समय के बाद भी स्वतंत्रता सेनानियों को उनका हक नहीं मिला और अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते कुछ की मौत भी हो गई। जी हां, हम बात कर रहे हैं स्वतंत्रता सेनानी सुलतान सिंह की, जिन्होंने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिंद फौज में रहकर अग्रेंजो से लड़कर देश को आजादी दिलाई। बावजूद इसके स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाली पेंशन व सरकारी सुविधाएं उनको नहीं मिल पाई और इस सिस्टम से लड़ते हुए उनकी मौत भी हो गई। अब उनकी वीरांगना इस हक लड़ाई लड़ रही हैं, लेकिन उम्र के अंतिम पड़ाव पर बैठी वीरांगना चांदकौर के साथ उसके परिवार को छोड़कर कोई साथ नहीं है। चांदकौर का परिवार पीएम, गृहमंत्री व सीएम को लगातार पत्र लिखकर अपने पति की स्वतंत्रता के एवज में मिलने वाली सुविधाओं की गुहार लगा रही है । गौर रहे कि रिकार्ड में उसके पति को स्वतंत्रता सेनानी माना गया हैं।

Freedom Fighter: इंदिरा गांधी ने की थी स्वतंत्रता सेनानियों के लिए पेंशन,सरकारी सुविधाओं की घोषणा

रेवाड़ी शहर से करीब 23 किलो मीटर दूर माजरा गांव में रहने वाली 80 वर्षीय वीरांगना चांदकौर आज भी उस हक लड़ाई लड़ रही है, जिसकी वह हकदार है। परिवार के पास मौजूदा दस्तावेज ये साबित करते हैं की स्वतंत्रता सेनानी सुलतान सिंह ने आजादी की लड़ाई में अहम योगदान दिया था और जेल में रहकर यातनाएं भी सही थी। सुलतान सिंह नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिंद फौज में शामिल थे और उन्होंने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। इसके अलावा पंजाब की नाभा जेल में उन्होंने 3 माह 19 दिन तक जेल भी काटी। उसके बाद देश आजाद हुआ और फिर सुलतान सिंह हिमाचल पुलिस में भर्ती हो गए। 1983 में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने आजादी की लड़ाई में शामिल होने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के लिए पेंशन व सरकारी सुविधाओं की घोषणा की थी। घोषणा के बाद सुलतान सिंह को भी काफी उम्मीदें थी और 7 साल तक पेंशन संबंधित सुविधाओं के लिए सुलतान सिंह अधिकारियों के कार्यालय में चक्कर लगाते रहे। आखिरकार 1990 में सुलतान सिंह गले में कैंसर के कारण जिदंगी की जंग हार गए और फिर उनका परिवार इस सम्मान के लिए लड़ाई लड़ रहा है। आजादी के इतने वर्ष बीतने के बावजूद स्वतंत्रता सेनानी सुलतान सिंह को जीते जी तो वह सम्मान नहीं मिला जिसके वह हकदार थे। ऐसे में अब यह देखना होगा की कब इस अंधे सिस्टम की आंखे खुलेंगी और स्वतंत्रता सेनानी सुलतान सिंह के परिवार को उनका हक मिलेगा।

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