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गाजियाबाद से Palampur पहुंची Archi परिजनों के सुपुर्द

गाजियाबाद से Palampur पहुंची Archi परिजनों के सुपुर्द

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धर्मशाला। गाजियाबद से लापता हुई और पालमपुर पुलिस को मिली 12 वर्षीय आर्ची को शनिवार को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी की बैठक के बाद कमेटी ने तमाम तथ्यों की छानबीन के बाद यह निर्णय लिया। इस निर्णय के बाद चाइल्ड लाइन ने बच्ची को उसके परिजनों के हवाले कर दिया। अपनी बच्ची को वापस पाने के बाद आर्ची के परिजन काफी खुश दिखे तो वहीं गाजियाबाद पुलिस द्वारा इस मामले में की जा रही कार्रवाई से उन्होंने अपनी नाराजगी भी जताई। आर्ची के पिता सुभाष यादव ने कहा कि इस गंभीर मामले में पुलिस सिर्फ गुमशुदगी के पहलू को रखकर जांच कर रही है और शायद अब पुलिस यह फाइल बंद भी कर दे।


  • परिजनों के आरोप अपहरण के आधार पर नहीं हो रही तफ्तीश
  • सिर्फ गुमशुदगी के लिहाज से छानबीन कर रही पुलिस

उनका कहना है कि उनकी बेटी बार-बार दो महिलाओं को उसका अपहरण करके लाने की बात कर रही है लेकिन पुलिस इस पहलू को बिल्कुल नजरअंदाज कर रही है। पुलिस न तो उन औरतों को ढूंढने की बात कर रही है और न ही अपहरण का कोई मामला दर्ज किया जा रहा है। सुभाष यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी बेटी 13 फरवरी को घर से गायब हुई थी। इस दौरान उन्होंने 13 फरवरी को ही गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी। पिता ने बताया कि उनकी बेटी ने बयान दिया है कि उसे 2 औरतें अपने साथ लेकर आई थीं। पहले उसे आल्टो कार द्वारा दिल्ली पहुंचाया गया तथा उसके बाद उसे ट्रेन के माध्यम से पठानकोट लाया गया। इसके बाद उसे एक छोटी ट्रेन द्वारा हिमाचल में लाया गया। लड़की ने बताया कि जब वह मारंडा पहुंची तो एक औरत को किसी का फोन आ गया। इसके चलते वह दूसरी औरत को चकमा देकर वहां पर उतर गई तथा पालमपुर बस स्टैंड पहुंच गई। यादव ने बताया कि उनकी 2 बेटियां हैं। आर्ची उनकी छोटी बेटी है तथा छठी कक्षा की छात्रा है। उन्होंने बताया कि वह अपनी बेटी की गुमशुदगी के बाद से ही काफी परेशान थे तथा हर जगह उसकी तलाश की। इसके अलावा उन्होंने थाने में भी बेटी की गुमशुदगी का मामला दर्ज करवाया था। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में किडनैपिंग होने की घटनाएं अकसर घटती रही हैं। इसके चलते किडनैपिंग के इस सक्रिय गिरोह को पुलिस द्वारा पकड़ा जाना जरूरी है ताकि किसी और के बच्चे को यूं दर-दर न भटकना पड़े। गौरतलब है कि आर्ची को पालमपुर पुलिस ने बस अड्डे के पास बरामद किया था। उस समय उसने अपना नाम टीना बताया था और खुद को अनाथ भी बताया था।

इसके बाद पुलिस ने उसे बाल आश्रय धर्मशाला भेज दिया जहां पर चाइल्डलाइन निदेशक रमेश मस्ताना ने उसकी काउंसलिंग की और उसके बाद ही इस बच्ची ने अपना सही नाम और पता बताया था। इस बच्ची द्वारा बताए गए फोन नंबर पर संपर्क करके इसके परिजनों से बात की गई और उसकी फोटो भेजकर शिनाख्त भी करवाई गई। बच्ची के धर्मशाला में होने की सूचना मिलने पर परिजन और गाजियाबाद पुलिस की एक टीम शुक्रवार को ही धर्मशाला पहुंची थी। शुक्रवार को बच्ची का मेडिकल करवाया गया था और चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी ने शनिवार को उसे परिजनों के सुपुर्द करने का फैसला सुनाया।

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