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अपने बच्चों को बागवानी सिखाएं, उन्हें धैर्यवान और मेहनती बनाएं

बच्चों में आते हैं कई गुण, प्रकृति से आत्मसात होने का मिलता है मौका

अपने बच्चों को बागवानी सिखाएं, उन्हें धैर्यवान और मेहनती बनाएं

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यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चों में करुणा, सहानुभूति, शेयरिंग और धैर्य जैसे गुण (Traits such as compassion, empathy, sharing and patience in children) हों तो उनको बागवानी की तरफ मुखातिब करें। प्रकृति के समीप रहकर बच्चे जिम्मेदार बनते हैं (children become responsible) । वहीं देखने में आता है कुछ माता-पिता (Parents) अपने बच्चों को मिट्टी से खेलने के लिए रोकते हैं। मगर इसके विपरीत बच्चों को खुले में खेलने, प्रकृति से जुड़ने और कीचड़ में हाथ में मलने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को बढ़ावा देना चाहिए। डिजीटल दुनिया सेहत के लिए नुकसानदायक मानी जा रही है। जब बच्चे प्रकृति के सानिध्य में रहेंगे तो इससे दूर रहेंगे। वहीं बच्चे मानसिक रूप से मजबूत भी होते हैं।

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बागवानी वैसे तो दिखने में खूबसूरत नजर आती है, मगर उसके लिए उतना ही कठिन काम भी करना पड़ता है। बागवानी के लिए धैर्य होना जरूरी है। बिना इसके काम नहीं चलता है। ऐसे में जब बच्चे आपके साथ मिलकर काम करेंगे तो उनमें धैर्य की प्रवृत्ति बढ़ेगी। वहीं काम करने से उनका इम्यून सिस्टम (immune system भी अच्छा होता है। जब बच्चे बागवानी करते समय एक-दूसरे की मदद करते हैं और एक-दूसरे की मदद भी मांगते हैं तो ऐसे में वे जीवन में किसी की मदद करने में कभी पीछे नहीं हटते हैं।

gardning

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प्रकृति में उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं। कभी बारिश तो कभी सूखा (sometimes rain and sometimes dry) तो कभी कीटों का हमला पैदावार को प्रभावित करता है। जीवन की तरह बागीचे की पैदावार में भी कई तरह की समस्याएं आती हैं। बागीचे की तरह ही हमारा जीवन भी आश्चर्यों, विपत्तियों से भरा हुआ होता है। कभी-कभी कुछ चीजें हमारी अपेक्षाओं से बिलकुल अलग ही होती हैं। ऐसे समय में आप अपने परिवार के साथ बागवानी करके समय बिता सकते हैं। पौधों की उचित धूप, हवा और पानी की जरूरत होती है। हम पौधों की जितनी ही देखभाल करेंगे तो हम उतना ही उनसे बातें भी करेंगे। उतनी ही फल, फूल और सब्जी (Fruits, flowers and vegetables) उनमें उगेगी। ठीक इस तरह से माता-पिता, दोस्तों और भाई-बहनों के साथ बातें करने और समय बिताने से जहां रिश्ते मजबूत होते हैं वहीं बच्चों को अच्छा इंसान बनने में मदद मिलती है। शहर में रहने वाले बच्चे मानते हैं कि हम जो भी खाते-पीते हैं वो मॉल में बनता है। मगर अनाज उगाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। इस चीज के बारे में बच्चों को बताना बहुत ही जरूरी होता है। जब उनको इसकी अहमियत पता चलेगी तो वे कभी अपना समय बर्बाद नहीं करेंगे।

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