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Geo Tagging में Jio free service खत्म होने की बाधा

Geo Tagging में Jio free service खत्म होने की बाधा

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Geo-tagging: धर्मशाला। जियो टैगिंग में देश भर में जिला कांगड़ा प्रथम रहा था लेकिन अब जियो टैगिंग के लिए जियो की मुफ्त सेवाएं नहीं होना ही बाधा बन गया है। मनरेगा कार्यों को ऑनलाइन दर्शाने के लिए देश मे जियो टैगिंग का कार्य हो रहा है और जिला कांगड़ा इसमें पूरे देश मे पहले स्थान पर रहा था। इस उपलब्धि के लिए 18 जनवरी को प्रदेश के सीएम ने ग्रामीण विकास विभाग और जिला प्रशासन के कर्मचारियों को सम्मानित भी किया था। अब जब से जियो ने मुफ्त सेवाओं में कटौती की है, तब से जियो टैगिंग के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले पंचायती राज संस्थाओं के कर्मियों की परेशानी बढ़ गई है। कर्मियों का कहना है कि जियो सिम निशुल्क होने के चलते पहले उनका जियो टैगिंग का कार्य सुचारु रूप से चल रहा था, लेकिन जब से जियो के रिचार्ज की बात सामने आई है, तब से उनकी परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में उन्हें जियो टैगिंग के लिए अपनी जेब से खर्च करने को मजबूर होना पड़ेगा।

Geo-tagging: डॉटा पैक उपलब्ध करवाएं या नकद भुगतान

जियो टैगिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि जियो टैगिंग के लिए या तो उन्हें डॉटा पैक उपलब्ध करवाया जाए या फिर डॉटा रिचार्ज करवाने के लिए नकद भुगतान की व्यवस्था की जाए। ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि वह मनरेगा कार्यों के संचालन अपनी भूमिका बखूबी निभा रहे हैं, जियो टैगिंग का कार्य भी उनके कंधों पर है। पहले तो जियो सिम निशुल्क होने के चलते उनके द्वारा जियो टैगिंग के कार्य को सुचारू रूप से किया जा रहा था, लेकिन अब जियो सिम का 300 से अधिक का रिचार्ज होने के चलते अपनी जेब से खर्च कर जियो टैगिंग के लिए डॉटा पैक डलवाने को मजबूर होना पड़ रहा है।


देश भर में पहले स्थान पर रहा था कांगड़ा

गौरतलब है कि मनरेगा कार्यों की जियो टैगिंग का कार्य शुरू किया गया है। जिसके तहत पंचायत स्तर पर सेवाएं दे रहे ग्राम रोजगार सेवकों, कंप्यूटर आपरेटर्स, पंचायत तकनीकी सहायकों व कनिष्ठ सहायकों को प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त इन कर्मियों को मनरेगा कार्यों की फोटो, कहां कार्य हुआ, कितना बजट था, कब कार्य पूरा हुआ सहित अन्य संपूर्ण जानकारियां जियो टैगिंग के माध्यम से उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया गया है, जिसमें जिला कांगड़ा को देश भर में प्रथम स्थान हासिल हुआ है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत किये गए कार्यों को सेटेलाइट के माध्यम से कहीं से भी देखा जा सके, इसके लिए भारत सरकार ने ज्योग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन मेटाडाटा योजना शुरू की थी जिसे जियो टैगिंग का नाम दिया गया था। इसके तहत वर्ष 2005 से मनरेगा के तहत किये गए विभिन्न विकास कार्यों को ऑनलाइन किया जाना है ताकि उनकी पूरी जानकारी कोई भी व्यक्ति कहीं से भी बैठकर हासिल कर सके। उस कार्य की स्वीकृति से लेकर बजट और मजदूरों के कार्यदिवस सहित तमाम जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध करवाई जानी प्रस्तावित है। इस कार्य में देश के सभी जिलों को पछाड़ते हुए कांगड़ा जिला ने पहला स्थान हासिल किया था।

खुद खर्च करने पड़ रहे हैं पैसे

ग्राम रोजगार सेवक संघ जिला कांगड़ा के अध्यक्ष साहब सिंह का इस बारे में कहना है कि जब से जियो सिम का रिचार्ज करवाने की बात सामने आई है, तब से हमें जियो टैगिंग के लिए खुद पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। प्रशासन से जियो टैगिंग की एवज में डॉटा पैक या नकद भुगतान की मांग की जाएगी, जिससे ग्राम रोजगार सेवक पहले की तरह आगे भी जियो टैगिंग कार्यों को बेहतर ढंग से अमलीजामा पहना सकें। वहीं इस बारे में डिप्टी डायरेक्टर-कम- प्रोजेक्ट ऑफिसर, डीआरडीए जिला कांगड़ा मुनीश कुमार शर्मा का कहना है कि ग्राम रोजगार सेवकों सहित जिन्हें भी जियो टैगिंग का प्रशिक्षण दिया गया है, उन्हें डॉटा पैक या भुगतान बारे उच्च अधिकारियों को लिखा गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी जियो टैगिंग के लिए प्रावधान कर दिया जाएगा।

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