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सभी के पाप-पुण्य का हिसाब रखते भगवान चित्रगुप्त

सभी के पाप-पुण्य का हिसाब रखते भगवान चित्रगुप्त

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मनुष्यों के पाप और पुण्य का हिसाब रखने वाले भगवान चित्रगुप्त का नाम तो सबने सुना होगा। हम सदियों से सुनते आए हैं कि मृत्यु के बाद हर मनुष्य का हिसाब धर्मपुरी में किया जाता है। वहां पर भगवान चित्रगुप्त धर्मराज की नगरी में सभी लोगों के पाप-पुण्य का हिसाब देखते हैं, पर इन्हें यह दायित्व कैसे दिया गया उसके पीछे भी एक कहानी है …
कहते हैं ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की और उसकी रक्षा का भार अपने ज्येष्ठ पुत्र पर सौंप कर समाधि लगा ली। हजारों वर्ष बीत गए ब्रह्मा विश्राम में थे, तब उनके शरीर से श्यामवर्ण… कमलवत् नेत्रों, लंबी भुजाओं वाले अति बुद्धिमान और तेजस्वी पुरुष प्रकट हुए। उनके हाथ में कलम और दवात थी। आंख खुलने पर जब ब्रह्मा ने उन्हें देखा तो पूछा- हे पुरुषोत्तम आप कौन हैं? उन्होंने उत्तर दिया- मैं आपके ही शरीर से उत्पन्न हुआ हूं और आपका ही पुत्र हूं। आप मेरा नामकरण करें और मेरे योग्य कार्य भी बताएं ताकि मैं आपकी सृष्टि में शामिल हो सकूं। ब्रह्मा ने कहा चूंकि तुम मेरे शरीर से उत्पन्न हुए इसलिए तुम्हारी संज्ञा कायस्थ है। पृथ्वी पर तुम्हारा नाम चित्रगुप्त विख्यात होगा।
धर्मपुरी में धर्म-अधर्म विचार के लिए तुम्हारा निश्चित निवास होगा। अब तुम अपना काम आरंभ कर सकते हो। ब्रह्मा जी वर देकर चले गए चित्रगुप्त के वंश में जो भी पुत्र हुए उन्होंने उन सबको पृथ्वी पर भेजा और शिक्षा दी कि वे देवताओं के पूजन, पितरों का श्राद्ध-तर्पण, ब्राह्मणों का पालन तथा अभ्यागतों की सेवा करें तथा देवी महिषमर्दिनी का पूजन करें। कहते हैं कि चित्रगुप्त का प्रभाव व्यापक है उनकी पूजा के चलते ही भीष्म को इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त हुआ था। ऋषि मुनियों का कहना है कि इस मृत्युलोक के ऊपर एक दिव्य लोक है जहां न जीवन का हर्ष है और न मृत्यु का शोक… वह लोक जीवन मृत्यु से परे है।
इस दिव्य लोक में देवताओं का निवास है और फिर उनसे भी ऊपर विष्णु लोक, ब्रह्मलोक और शिवलोक है। जीवात्मा जब अपने प्राप्त शरीर के कर्मों के अनुसार विभिन्न लोकों को जाता है। जो जीवात्मा विष्णु लोक, ब्रह्मलोक और शिवलोक में स्थान पा जाता है उन्हें जीवन चक्र में आवागमन यानी जन्म मरण से मुक्ति मिल जाती है। जो जीवात्मा अपने पाप कर्म से दूषित हो जाता है, उन्हें यमलोक जाना पड़ता है। मृत्यु काल में इन्हें साथ ले जाने के लिए यमलोक से यमदूत आते हैं। यमराज के दरबार में उस जीवात्मा के कर्मों का लेखा जोखा होता है। कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले भगवान हैं चित्रगुप्त। यही भगवान चित्रगुप्त जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त जीवों के सभी कर्मों को अपनी पुस्तक में लिखते रहते हैं और जब जीवात्मा यमराज के समझ पहुंचता है तो उनके कर्मों को एक-एक कर सुनाते हैं और उन्हें अपने कर्मों के अनुसार क्रूर नjक में भेज देते हैं।

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