Covid-19 Update

2,05,061
मामले (हिमाचल)
2,00,704
मरीज ठीक हुए
3,498
मौत
31,396,300
मामले (भारत)
194,663,924
मामले (दुनिया)
×

90 वर्षों बाद सरानाहुली मेले में आई माता पार्वती

90 वर्षों बाद सरानाहुली मेले में आई माता पार्वती

- Advertisement -

देवमय हुआ जल्लूग्रां, शोभायात्रा में उमड़ी भीड़

कुल्लू। मणिकर्ण घाटी के जल्लूग्रां में 90 वर्षों बाद सरानाहुली मेले में माता पार्वती ने शिरकत की। अपने मुख्य मंदिर चौंग से माता की भव्य यात्रा जल्लूग्रां तक निकाली गई। इस दौरान जल्लूग्रां में माहौल देवमय हुआ है और देवनृत्य का भी आयोजन किया गया। यहां पर माता ने नरसिंग भगवान से भव्य मिलन किया। जल्लूग्रां में हर वर्ष सरानाहुली मेले का आयोजन होता है, लेकिन लंबे अरसे बाद माता पार्वती के रथ को भी इस मेले में लाया गया। बुर्जुगों के अनुसार 90 वर्षों के बाद माता पार्वती को इस मेले में आमंत्रित किया गया।
देवी माता के कारदार दुनी चंद, पुजारी गेहर चंद, कठियाला जीवन चंद, मंदिर कमेटी के प्रधान देवेंद्र शर्मा, गुर कुंदन लाल ने बताया कि अब हर वर्ष सरानाहुली मेले में माता पार्वती का आगमन होगा। उन्होंने बताया कि 90 वर्ष पहले माता इस मेले में आती थी, लेकिन उसके बाद यह परंपरा टूट गई थी, लेकिन इस बार माता के आदेश पर जल्लूग्रां व चौंग वासियों ने यह निर्णय लिया कि मेले की शोभा बढ़ाने के लिए फिर से माता पार्वती को मेले में लाया जाएगा। इस दौरान प्रथम दिन जहां माता का भव्य आगमन हुआ वहीं, दूसरे दिन सैकड़ों लोगों ने माता के पास आकर शीश नवाजा और आशीर्वाद लिया, जबकि तीसरे दिन यहां पर धूप व विरशु का आयोजन किया गया। गौर रहे कि धूप एक तरह की विशेष पूजा होती है, जिसमें गांव की सभी महिलाएं व क्षेत्र की विवाहित बेटियां माता के पास विशेष पूजा के लिए पहुंचती हैं।

Goddess Parvati: पारंपरिक परिधानों में होती है पूजा

इस पूजा में पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित महिलाएं थाली में धूप, फूल, चावल, कुमकुम व अन्य सामग्री ले जाती हैं और बारी-बारी करके माता का पूजन करती हैं। इस प्रक्रिया के बाद यहां पर जल्लूग्रां में विरशु मेले का भी आयोजन हुआ। विरशु मेले में जहां बीच में माता पार्वती का नृत्य होता है वहीं, चारों ओर महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करती हैं। यह नृत्य पुरातन माता के रागों व गीतों पर आधारित होता है और ढोल-नगाड़ों, शहनाई व करनालों की धुन में भव्य नृत्य हुआ। इस नृत्य को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। नृत्य के अंतिम क्षण में देउली का आयोजन होता है और माता गुर के माध्यम से भविष्यवाणी करती है। इस बार सरानाहुली मेले को बड़ी धूमधाम से मनाया गया और लोगों ने मेहमाननवाजी का भरपूर आनंद लिया। लोग दूर-दूर से माता के दर्शन व मेले का आनंद लेने यहां पहुंचे थे। सनद रहे कि यहां पर माता पार्वती का चौंग गांव में भव्य मंदिर है और माता के कई रूपों को यहां पर दर्शाया गया है।

कुल्लू में विराजमान है माता का परिवार

माता पार्वती का पूरा परिवार देवभूमि कुल्लू में विराजमान है। शिव भगवान बिजली महादेव में विराजमान हैं और कार्तिक व गणेश भी इसी जिला में मौजूद हैं। दशहरा उत्सव के दौरान शिव परिवार का भव्य मिलन होता है और यह मिलन आकर्षण का केंद्र रहता है। माता पार्वती को मणिकर्ण घाटी की अधिष्ठाता देवी माना जाता है और पूरे प्रदेश से लोगों यहां माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। 

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है