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भक्तों की रक्षक मां पीतांबरा

भक्तों की रक्षक मां पीतांबरा

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महान ऊर्जा शक्ति की स्रोत मां पीतांबरा या बगलामुखि का महाविद्याओं में आठवां स्थान है। जो भी मां बगलामुखि का साधक है उसके चारों ओर वल्गा का एक सुरक्षा चक्र घूमता रहता है और हमेशा उसकी रक्षा करता है। इस शक्ति का मूल है अथर्वा प्राण सूत्र। रोचक यह है कि यह सूत्र हर प्राणी में सुषुप्तावस्था में विद्यमान होता है और साधना से जागृत हो जाता है। बगलामुखि पीतांबरधारी विष्णु की अमोघशक्ति सहचरी हैं इसलिए यह सोलह शक्तियों से पूर्ण ऊर्जा शक्ति है।
mataएक बार पृथ्वी पर भयंकर तूफान आया और प्रलय की स्थिति बन गई। ऐसा लगा कि सृष्टि समाप्त हो जाएगी। सभी देवताओं के साथ भगवान विष्णु भी चिंतित होकर हरिद्रासरोवर के पास गए। वहां सभी ने सम्मिलित रूप से मां बगला का ध्यान किया। तपस्या की पूणर्ता के साथ मंगलवार चतुर्दशी के दिन सौराष्ट्र हरिद्रा सरोवर में मां का अविर्भाव हुआ। श्रीविद्या के रूप में प्रकट हुई मां बगला का रंग चंपई थाऔर वे पीत रेशमी वस्त्रों तथा आभूषणों से सुसज्जित थीं। प्रकट होते ही उन्होंने प्रलय का स्तंभन कर दिया। आज भी वे साधारण भक्त के लिए भी रक्षक की भूमिका निभाती हैं। अपने साधकों के लिए वे कल्पतरु हैं जिनके कार्य सोचने मात्र से संपन्न हो जाते हैं। मां की उपासना तांत्रिक अनुष्ठान के नियमों के अंतर्गत की जाती है। पीले वस्त्र,पीले पुष्प और पीला नैवेद्य इन्हें अत्यंत प्रिय हैं। ये स्तंभन की देवी हैं और सारे ब्रह्मांड की शक्तियां मिलकर भी इनका मुकाबला नहीं कर सकतीं। इनकी साधना किसी भी मंगलवार से आरंभ की जा सकती है।


mata3मंत्र-
ऊँ ह्लीं बगलामुखि,सर्वदुष्टानां वाचमुखं,पदं स्तंभय
जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ऊँ स्वाहा।
एकांत कमरा चुनें उसे शुद्ध करके एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछा कर मां बगला का चित्र स्थापित करें। अनुष्ठान से पहले कवच पाठ करें आसन और आपका वस्त्र पीला हो। हल्दी की माला, पीला चंदन और पीले ही पुष्पों से पूजन करें तथा पीला नैवेद्य ही चढ़ाएं। पूरे 21 दिनों तक108 मंत्र जप रोज करें। जप समाप्त होने के बाद इसी मंत्र से108 आहुति दें। संभव हो तो पांच-सात कन्याओं को भोजन करवा, दक्षिणा देकर विदा करें।

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