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मन की बात की गोल्डन जुबली : मोदी बोले – नहीं होने दिया कार्यक्रम का राजनीतिकरण

मन की बात की गोल्डन जुबली : मोदी बोले – नहीं होने दिया कार्यक्रम का राजनीतिकरण

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नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 50वें एपिसोड में पीएम मोदी का संबोधन बेहद खास रहा, उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी।मोदी ने कहा, “जब ‘मन की बात’ शुरू किया था तभी मैंने तय किया था कि न इसमें राजनीति हो, न इसमें सरकार की वाह-वाही हो, न इसमें कहीं मोदी हो और मेरे इस संकल्प को निभाने के लिए सबसे बड़ा संबल, सबसे बड़ी प्रेरणा मिली आप सबसे। मोदी आएगा और चला जाएगा लेकिन यह देश अटल रहेगा, हमारी संस्कृति अमर रहेगी। 130 करोड़ देशवासियों की छोटी-छोटी यह कहानियां हमेशा जीवित रहेंगी। इस देश को नई प्रेरणा में उत्साह से नई ऊंचाइयों पर लेती जाती रहेंगी।”

मन की बात की गोल्डन जुबली पर पीएम ने कहा कि अगले वर्ष 2019 में हम गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाश-पर्व मनाने जा रहे हैं। उन्होंने सदा ही पूरी मानवता के कल्याण के लिए सोचा। उन्होंने समाज को हमेशा सत्य, कर्म, सेवा, करुणा और सौहार्द का मार्ग दिखाया। गुरु नानक जी से जुड़े पवित्र स्थलों के मार्ग पर एक ट्रेन भी चलाई जाएगी। भारत सरकार ने करतारपुर कॉरीडोर बनाने का एक बड़ा महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, ताकि हमारे देश के यात्री आसानी से पाकिस्तान के करतारपुर में गुरु नानक देव जी के पवित्र स्थल पर दर्शन कर सकें।

लोकतंत्र बाबा साहब के स्वभाव में रचा-बसा था, वो कहते थे कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्य कहीं बाहर से नहीं आए हैं। संविधान सभा में उन्होंने एक बहुत भावुक अपील की थी कि इतने संघर्ष के बाद मिली स्वतंत्रता की रक्षा हमें अपने खून की आखिरी बूंद तक करनी है।

संविधान सभा के बारे में बात करते हुए उस महापुरुष का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता जो संविधान सभा के केंद्र में रहे। ये महापुरुष थे पूजनीय डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर। 6 दिसंबर को उनका महा-परिनिर्वाण दिवस है। मैं सभी देशवासियों की ओर से बाबा साहब को नमन करता हूं।

संविधान सभा देश की महान प्रतिभाओं का संगम थी, उनमें से हर कोई अपने देश को एक ऐसा संविधान देने के लिए प्रतिबद्ध था जिससे भारत के लोग सशक्त हों, ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति भी समर्थ बने। हमारे संविधान में खास बात यही है कि इसमें अधिकार और कर्तव्य के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है।

कल ‘संविधान दिवस’ है, यह उन महान विभूतियों को याद करने का दिन है जिन्होंने हमारा संविधान बनाया। 26 नवम्बर, 1949 को हमारे संविधान को अपनाया गया था। संविधान ड्राफ्ट करने के इस ऐतिहासिक कार्य को पूरा करने में संविधान सभा को 2 वर्ष, 11 महीने और 17 दिन लगे।

आज के युवाओं की यह खूबी है कि वो ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिस पर स्वयं उन्हें विश्वास न हो और जब वो किसी चीज़ पर विश्वास करते हैं तो फिर उसके लिए सब कुछ छोड़-छाड़ कर उसके पीछे लग जाते हैं।

देश के अधिकतर जिलों में मैं गया हूं और देश के दूर-दराज जिलों में मैंने काफी समय बिताया है, इसके कारण जब मैं पत्र पढ़ता हूँ तो मैं उस स्थान और सन्दर्भ से रिलेट कर पाता हूं। सच पूछिए तो मन की बात में आवाज़ मेरी है, लेकिन उदाहरण, भाव और शक्ति मेरे देशवासियों की ही है।

भारत जैसे देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए जन-सामान्य की प्रतिभाएँ पुरुषार्थ को उचित स्थान मिले, यह हम सबका एक सामूहिक दायित्व है और ‘मन की बात’ इस दिशा में एक नम्र और छोटा सा प्रयास है।

मन की बात’ सरकारी बात नहीं – यह समाज की बात है. ‘मन की बात’ एक महत्वाकांक्षी भारत की बात है। भारत का मूल-प्राण राजनीति नहीं है, भारत का मूल-प्राण समाजनीति और समाज-शक्ति है।

कब किसी की इतनी ताक़त होगी कि #selfiewithdaughter की मुहिम हरियाणा के एक छोटे से गाँव से शुरू होकर पूरे देश में ही नहीं, विदेशों में भी फैल जाए। समाज का हर वर्ग, सेलेब्रिटी सब जुड़कर साथ आएं और समाज में सोच-परिवर्तन की एक नई भाषा में, जिसे आज की पीढ़ी समझती हो, ऐसी अलख जगा जाए।

मुझे यह देखकर के खुशी हुई कि ‘मन की बात’ के कारण रेडियो,और अधिक लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन यह केवल रेडियो ही नहीं है बल्कि TV, FM रेडियो, मोबाइल, इन्टरनेट, फ़ेसबुक लाइव के साथ-साथ NarendraModiApp के माध्यम से भी ‘मन की बात’ में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं।

हर महीने लाखों की संख्या में पत्रों को पढ़ते, फोन कॉल्स सुनते, एप और MyGov पर कमेंट देखते और इन सबको एक सूत्र में पिरोकर के, हल्की-फुल्की बातें करते-करते 50-एपिसोड का ये सफ़र हम सबने मिलकर तय किया है। जिन लोगों के बीच सर्वे किया गया है, उनमें से औसतन 70% नियमित रूप से ‘मन की बात’ सुनने वाले लोग हैं।

मई 2014 में जब मैंने एक ‘प्रधान-सेवक’ के रूप में कार्यभार संभाला तो मेरे मन में इच्छा थी कि देश की एकता, भव्य इतिहास, उसका शौर्य, भारत की विविधताएं हमारे समाज के रग-रग में समाई हुई अच्छाइयां, पुरुषार्थ, जज़्बा, त्याग, तपस्या इन सारी बातों को जन-जन तक पहुंचाना चाहिए।

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