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कलम को बंदूक बनाकर महिलाओं के हक के लिए लड़ने वालीं इस्मत को डूडल से श्रद्धांजलि

कलम को बंदूक बनाकर महिलाओं के हक के लिए लड़ने वालीं इस्मत को डूडल से श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली। गूगल अक्सर खास मौकों पर सुंदर से डूडल बनाता रहता है। आज भी गूगल ने उर्दू की मशहूर लेखिका इस्मत चुगताई की याद में खूबसूरत डूडल तैयार किया है। आज यानी 21 अगस्त को इस्मत की 107वीं जयंती है, इस मौके पर गूगल ने एक डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। इस्मत चुगताई ने अपनी रचनाओं के जरिए महिलाओं के सवालों को नए सिरे से समाज के सामने उठाया। इन्हें इस्मत आपा के नाम से भी जाना जाता है। गूगल ने अपने डूडल इस्मत चुगताई को सफेद रंग की साड़ी पहने हुए दिखाया है, इस डूडल में वो लिखती हुई नजर आ रही हैं।

इस्मत का जन्म यूपी के बदायूं में हुआ था। वह दस भाई बहन थीं। इस्मत अपने माता-पिता की नौवीं संतान थीं। 1942 उन्होंने अपनी सबसे विवादित कहानी ‘लिहाफ’ लिखी थी, जिसके कारण उनके ऊपर लाहौर हाईकोर्ट मे मुकदमा भी चला। आरोप था कि चुगताई ने अपने इस लेख में अश्लीलता दिखाई है। हालांकि ये मुकदमा बाद में खारिज हो गया। इस कहानी को भारतीय साहित्य में लेस्बियन प्यार की पहली कहानी भी माना जाता है। दरअसल अपने इस लेख में चुगताई ने एक गृहिणी की कहानी दिखाई थी जो पति के समय के लिए तरसती है।


इस्मत चुगताई पूरी जिंदगी अपनी कलम को बंदूक बनाकर महिलाओं के हक के लिए लड़ती रहीं। उन्होंने अपनी रचनाओं के जरिए महिलाओं की दबी हुई आवाज को दुनिया के सामने उठाया। चुगताई ने विशेष तौर पर अपनी रचनाओं में निम्न और मध्यम वर्ग से आनी वाली मुस्लिम तबके की लड़कियों की दबी-कुचली आवाज उठाई। इस्मत ने 1938 में लखनऊ के इसाबेला थोबर्न कॉलेज से बीए किया। उन्‍होंने कहानी संग्रह – चोटें, छुई-मुई, एक बात, कलियां, एक रात, शैतान, उपन्यास – टेढ़ी लकीर, जिद्दी, दिल की दुनिया, मासूमा, जंगली कबूतर, अजीब आदमी भी लिखी। उन्‍होंने आत्‍‍‍‍मकथा भी ल‍िखी। 24 अक्टूबर, 1991 में उनकी मौत हो गई।

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