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अमृत तुल्य है आंवला

अमृत तुल्य है आंवला

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आयुर्वेद के अनुसार हरीतकी (हड़) और आंवला दो सर्वोत्कृष्ट औषधियां हैं। इन दोनों में आंवले का महत्व अधिक है। आंवला में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है। यह एशिया के अलावा यूरोप और अफ्रीका में भी पाया जाता है। हिमालयी क्षेत्र और प्राद्वीपीय भारत में आंवला के पौधे बहुतायत मिलते हैं। आंवला में ऐसे कई गुण है, जो शरीर के लिए बेहद गुणकारी हैं। यह न सिर्फ हमारे शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाता है बल्‍कि कई बीमारियों को जड़ से भी खत्‍म करता है। अपनी इन खूबियों की वजह से आंवले को 100 रोगों की एक दवा माना जाता है। यही वजह है कि आयुर्वेद में आंवले की तुलना अमृत से की गई है।


  • आंवले का रस आंखों के लिए बहुत फायदेमंद है। आंवला आंखों की ज्योति को बढ़ाता है।
  • यह मेटाबोलिक क्रियाशीलता को बढ़ाता है। आंवला भोजन को पचाने में बहुत मददगार साबित होता है ,तथा इससे अम्लीय पित्त के बुरे प्रभाव से छुटकारा मिलता है।
  • आंवला में क्रोमियम तत्व पाया जाता है जो डायबिटिक के लिए उपयोगी होता है। आंवला इंसुलिन होरमोंस को को सुदृढ़ करता है और खून में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करता है।आंवला के रस में शहद मिलाकर लेने से डायबिटिक वालों को बहुत फायदा होता है।

  • आंवले के सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं औरओस्ट्रोपोरोसिस, आर्थराइटिस एवं जोड़ों के दर्द में भी आराम मिलता है।
  • इसके सेवन से तनाव में आराम मिलता है। अच्छी नींद आती है।आंवला के तेल को बालों के जड़ों में लगाया जाए तो कलर ब्लाइंडनेस से छुटकारा मिलता है।

  • आंवला में बैक्टीरिया और फंगस से लड़ने की क्षमता होती है इसकी वजह से यह बाहरी बीमारियों से भी हमें बचा लेता है।
  • अगर किसी को नकसीर की तकलीफ है तो उन्हें आंवला का सेवन करता फायदेमंद होता है। ऐसे में ताज़ा रस 3-4 चम्मच का सेवन करना चाहिए ,या 1 ग्राम चूर्ण को 50 मिलिग्राम पानी के साथ लेना चाहिए।
  • आंवला हमारे ह्रदय के मांसपेशियों के लिए उत्तम होता है। यह ह्रदय की नालिकाओं में होने वाली रुकावट को खत्म करता है।

  • खराब कोलेस्ट्रोल को खत्म कर अच्छे कोलेस्ट्रोल को बनाने में मदद करता है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट तत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर में फ्री रेडिकल को बनाने ही नहीं देता । एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में एमिनो एसिड और पेक्टिन पाए जाते हैंजो कलेस्ट्रोल नहीं बनाने देते और ह्रदय की मांशपेशियों को मजबूती देते हैं।
  • आंवला का पाउडर और शहद सेवन करें या आंवला के रस में मिश्री मिलकर सेवन करने से उल्टियों का आना बंद हो जाता है।
    आंवला के बारे में कितना भी कहा जाये बहुत कम ही है। यह 100 रोगों की एक दवा है । इसे आप किसी भी रूप में सेवन कर सकते हैं।

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