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आचार्य बोले, इतने वैज्ञानिकों के बाद किसानों का Suicide करना चिंतनीय

आचार्य बोले, इतने वैज्ञानिकों के बाद किसानों का Suicide करना चिंतनीय

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सोलन। डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्विद्यालय नौणी का आठवें दीक्षांत समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के डॉ. एलएस नेगी सभागार में आयोजित किया गया। समारोह के अध्यक्ष राज्यपाल हिमाचल प्रदेश एवं विश्वविद्यालय कुलाधिपति आचार्य देवव्रत एवं मुख्यातिथि के रूप में डॉ. त्रिलोचलन महापात्रा महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभिन्न संकाय में उत्तीर्ण लगभग 900 छात्रों को डिग्री दी गई, जिसमें से 18 छात्रों को स्वर्णपदक प्रदान किया गया। स्वर्ण पदक विजेताओं में 15 छात्राएं व 3 छात्र थे।

  • नौणी विश्विद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में की शिरकत
  • बोले, डिग्री तक सीमित न रहे छात्र, इसका लाभ किसानों तक पहुंचाएं 

कुलाधिपति महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि महिला शिक्षा का जीता जागता प्रमाण इस विश्वविद्यालय में देखने को मिला। जिसमें 67 प्रतिशत छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी बेटियां किसी से कम नहीं है व वे सेना से लेकर कृषि क्षेत्र तक हर क्षेत्र में अपना लोहा मनावा रही है।  महामहिम ने कहा कि आज के छात्र देश का भविष्य है व उन्हे कर्म ही पूजा के सिद्वांत पर चलना होगा।  तभी देश तरक्की कर सकता है। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वह डिग्री तक सीमित न रहे व इसका लाभ किसानों तक पहुंचाएं। उन्होने कहा कि इतने वैज्ञानिकों के बाद देश में किसान आत्महत्या करके यह चिंतनीय विषय है।

विश्वविद्यालय के लगभग चालीस वर्ष आंरभ होने के बाद भी किसानों तक तकनीकी का विस्तार नहीं हो पाया है। इसके लिए प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कृषि के लिए किताबी ज्ञान के अलावा जमीनी अनुभव की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए वैज्ञानिकों को किसानों तक पहुंचने का प्रयास करना चाहिए, ताकि देश की कृषि आय दो गुना हो सके। उन्होंने खेती में उर्वरक न प्रयोग करने का आह्वाहन करते हुए कहा कि इससे न केवल जमीन बंजर हो रही है बल्कि पेस्टीसाइड से अनेक बीमारियों भी पनप रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञनिकों को किताबी ज्ञान का अहंकार छोड़कर किसानों के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कृषि विभाग ,कृषि विज्ञान केन्द्र व विश्वविद्यालय के बीच सामजस्य की कमी बताते हुए उसे दूर करने का भी आह्वान किया।

कार्यक्रम के मुख्यातिथि डॉ. त्रिलोचलन महापात्रा महानिदेशक , भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् एवं सचिव , कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने अपने संबोधन में कहा कि छात्रों के साथ्ज्ञ अध्यापकों को भी अपना विश्लेषण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्यापक देश के भविष्य को तैयार करता है, ऐसे में अध्यापक को अपने कर्तव्य का पूरा निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय में 65 प्रतिशत से अधिक छात्राओं की उपस्थिति को भी एक अच्छा प्रयास बताया।

उन्होंने कहा कि शिक्ष गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि अच्छे वैज्ञानिक समाज को मिल सके।  दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक विजेता छात्र शिशम राणा और रेखा राही ने खुशी जताते हुए कहा कि यह उनके लिए एक बहुत स्मरणीय क्षण रहा है व इसके वे हमेशा याद रखेंगे। 

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