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गुड़िया Murder Case: जिला परिषद की Meeting से विपक्षी सदस्यों ने किया वॉकआउट

गुड़िया Murder Case: जिला परिषद की Meeting से विपक्षी सदस्यों ने किया वॉकआउट

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शिमला। जिला परिषद की बैठक में गुड़िया प्रकरण की खूब गूंज रही। बचत भवन में हुई बैठक में कोटखाई मामले को लेकर खूब शोरगुल रहा। जिला परिषद की बैठक यह मुद्दा उठा और कहा कि यदि पुलिस ने इस मामले को सही से डील किया होता तो आज यहां यह नौबत न आती। बैठक में डीसी रोहन ठाकुर पर भी निशाना साधा गया और कहा कि डीसी यदि इस मामले में पीड़ित परिवार से मिलने में देरी न करते तो शायद लोगों का गुस्सा न भड़कता। इससे नाराज कई सदस्यों ने जिला परिषद बैठक से वाकआउट किया। वाकआउट करने वालों में नीलम सरैइक, इंदु वर्मा, रेखा मोघटा वंदना मेहता, रीना ठाकुर,आर हास्टा, अरविंद धीमान, चेतराम आजाद,  बीडीसी ठियोग के अध्यक्ष मदनलाल वर्मा समेत कई सदस्य शामिल थे।

  • पार्षदों ने निशाने पर लिए डीसी शिमला, सही डील करते तो न बिगड़ते हालात

जिला परिषद सदस्य नीलम सरैइक ने शुक्रवार को बैठक में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज शिमला जिला में कानून व्यवस्था की जो स्थिति बिगड़ी है, उसके लिए पुलिस प्रशासन ही दोषी है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने शुरू से ही इस मामले को ठीक से हैंडल नहीं और फिर सीएम के फेसबुक से कुछ लोगों के फोटो सार्वजनिक हुए और फिर वह फोटो हटा दिए। इससे भी लोगों का गुस्सा फूटा। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है और उम्मीद है कि वह इस मामले की असलियत सामने लाएगी। 

डीजीपी और एसआईटी सदस्यों हो सस्पेंड

नीलम सरैइक ने कहा कि पुलिस प्रशासन की नाकामी से सारी स्थितियां खराब हुई हैं और इसके लिए डीजीपी और एसआईटी के सदस्यों पर कार्रवाई की जानी चाहिए और उन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोटखाई में पुलिस लॉकअप में एक आरोपी की हत्या हो जाती है और उसके बाद हिंसा भड़की। उन्होंने कहा कि कोटखाई का माहौल क्यों भड़का और उसके लिए कौन दोषी है, इस पर तो कोई कार्रवाई नहीं हो रही, लेकिन थाने फूंके जाने के मामले में पुलिस तेजी से कार्रवाई में लगी है और 48 लोगों की सूची बनाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सीबीआई को को गुड़िया प्रकरण से जुड़े सारे मामलों की जांच करनी चाहिए।

उधर, बीडीसी ठियोग के अध्यक्ष मदन लाल वर्मा ने इस मामले पर बोलते हुए कहा कि गुड़िया का कृत्य निंदनीय है और जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन इससे निपटने में पूरी तरह नाकाम रहा है। उनका कहना था कि ठियोग में लोगों का गुस्सा और बढ़ता यदि डीसी समय रहते पीड़ित परिवार के पास जाते और मामले की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई करते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और वे खामोश बैठे रहे। उन्होंने कहा कि डीसी तो 15 दिन के बाद जाकर गुड़िया के परिजनों से मिले और पहले जाते तो ठियोग में चक्का जाम भी नहीं होता।

जल्द सामने आए सच्चाई

वहीं, जिला परिषद सदस्य दलीप कायस्थ ने कहा कि गुड़िया प्रकरण निंदनीय घटना है और इस मामले की जल्द से जल्द सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने अध्यक्ष से मांग की कि सदन में इस मामले पर विशेष प्रस्ताव लाकर चर्चा की जाए। क्योंकि इस गंभीर मामले पर सभी सदस्य बोलना चाहते हैं। इस पर अध्यक्ष धर्मिला हरनोट ने कहा कि इस पर अलग से चर्चा होगी और विशेष प्रस्ताव लाया जाएगा।

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