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आईपीएच विभाग की मंजूरी बिना नहीं लगेंगे हैंडपंप

आईपीएच विभाग की मंजूरी बिना नहीं लगेंगे हैंडपंप

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लेखराज धरटा/ शिमला। वित्तायोग ने हैंडपंप लगाने के लिए पंचायती राज विभाग (Panchayati Raj Department) को 245 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। हैंडपंप लगाने के लिए एक शर्त भी लगा दी गई है। इसके तहत पंचायतें अपनी मर्जी से हैंडपंप नहीं लगा सकेंगी। इसके लिए आईपीएच विभाग से मंजूरी लेनी होगी। विभाग की मर्जी से ही पंचायतों में हैंडपंप लग सकेंगे। दूसरी तरफ आईपीएच विभाग (IPH Department)  ने प्रदेश में नए हैंडपंप लगाने की प्रक्रिया लगभग बंद ही कर दी है।

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इस साल विभाग ने नामात्र के ही हैंडपंप लगाए हैं। विभाग की आगे भी अपने स्तर पर नया हैंडपंप लगाने की फिलहाल कोई मंशा नहीं है। ऐसे में पंचायतों में हैंडपंप लगाने के लिए ग्रामीणों को विभाग की मर्जी पर निर्भर रहना होगा। विभाग ग्रामिणों से मिलने वाले प्रस्ताव के आधार पर यूं ही हैंडपंप नहीं लगाएगा। हैंडपंप (hand Pump) लगाने के लिए विभाग पहले बाकायदा संबंधीत क्षेत्र का ज्योलॉजिकल सर्वे करवाएगा। क्षेत्र में अगर हैंडपंप लगाने के लिए परिस्थितियां अनूकूल नहीं पाई गईं तो वहां पर हैंडपंप नहीं लगेगा। सरकार ने इसके साफ संकेत दिए हैं।

गिरते भूमिगत जलस्तर को देखते हुए बंद किया काम

प्रदेश में तेजी से गिरते भूमिगत जलस्तर को देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया है कि अब प्रदेश में नए हैंडपंप फिलहाल नहीं लगाए जाएंगे। बेहद जरुरी होने पर ही सरकार इस तरफ विचार करेगी। इसके लिए भी पहले ज्यॉलॉजिकल सर्वे होगा। भूमिगत जलस्तर (Underground water level) कम होने पर भी वहां हैंडपंप नहीं लगाए जांएगे। आवश्यकतानुसार ही हैंडपंप लगेंगे।

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40 हजार से अधिक हैंडपंप लगाए गए

प्रदेश में 40 हजार से अधिक हैंडपंप लगाए जा चुके हैं। यह सरकार के लिए महंगा सौदा भी साबित हो रहा है। इससे बचने के लिए भी सरकार ने अधिक हैंडपंप लगाने की बजाए आवश्यकतानुसार ही हैंडपंप लगाने का निर्णय लिया है। इससे पहले प्रदेश में हैंडपंप लगाने के लिए सरकार (Government) लक्ष्य तय करती थी। गर्मियों से निपटने के लिए सरकार हर साल 2500 से 3000 तक हैंडपंप लगाने का लक्ष्य तय करती थी।  इसके लिए अलग से बजट भी जारी किया जाता था, लेकिन इस बार सरकार ने हैंडपंप लगाने का कोई लक्ष्य तय नहीं किया।

खराब पड़े हैंडपंपों का पता लगाएगी सरकार 

प्रदेश में लगाए गए हैंडपंपों की क्या स्थिति है, राज्य सरकार इसका भी पता लगाने में जुट गई है। आईपीएच मंत्री (IPH Minister) ने अधिकारियों को प्रदेश हैंडपंपों का पता लगाने को कह दिया है। इसमें कितने वर्किंग कंडिशन में है और कितने खराब पड़े हैं, सरकार इस बात का पता लगा कर खराब हैंडपंप को स्टोर करेगी।

नलों से पानी देने की व्यवस्था अपनाएगी सरकार 

हैंडपंप की जगह सरकार नलों से पानी देने की व्यवस्था को अपनाएगी। इसके लिए सरकार प्रदेश में शीघ्र एक सर्वे करवाने जा रही है जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि कितने घरों में पानी के कनेक्शन हैं। सरकार इस बात का भी पता लगाएगी कि इनमें से कितने घरों में 25 से 50 लीटर पानी प्रतिदिन प्रति व्यक्ति के हिसाब दे दिया जा रहा है। इसकी स्टडी रिपोर्ट तैयार करने के बाद सरकार नलों से पानी देने की नई योजना तैयार करेगी और हर घर को पानी के कनेक्शन से जोड़ा जाएगा, ताकि लोगों की हैंडपंप पर निर्भरता को समाप्त किया जा सके।

आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर बोले

“वित्तायोग ने भले ही पंचायतों को हैंडपंप लगाने के लिए बजट मंजूर किया हो, लेकिन विभाग की मंजूरी के बिना हैंडपंप नहीं लगेंगे। हैंडपंप लगाने के लिए संबंधित क्षेत्र का ज्यॉलॉजिकल सर्वे होगा उसी आधार पर हैंडपंप लगाने की मंजूरी दी जाएगी”।

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