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सराज का दिव्यांग पेट में पत्थरी लिए लगा रहा हॉस्पिटल के चक्कर, नहीं हो रहा ऑपरेशन

आज तय कर दी थी ऑपरेशन की तारीख, ऐन मौके पर डॉक्टर ने किया मना

सराज का दिव्यांग पेट में पत्थरी लिए लगा रहा हॉस्पिटल के चक्कर, नहीं हो रहा ऑपरेशन

मंडी। एक दिव्यांग मरीज पत्थरी का ऑपरेशन करवाने के लिए 6 बार जोनल हॉस्पिटल मंडी से लेकर मेडिकल कॉलेज नेरचौक के चक्कर काट चुका है, लेकिन उसका ऑपरेशन नहीं किया जा रहा है। दिव्यांग प्रताप सिंह सीएम जयराम ठाकुर के गृहक्षेत्र सराज के च्यूणी गांव का रहने वाला है। शारीरिक रूप से शत प्रतिशत विकलांग प्रताप सिंह सबसे पहले सितंबर महीने में जोनल हॉस्पिटल मंडी आया। डॉक्टरों ने पांच दिनों तक दाखिल रखा और फिर एक महीने बाद आने को कहा। नवंबर महीने फिर से जोनल हॉस्पिटल पहुंचा तो पता चला कि यहां के डॉक्टर अब मेडिकल कॉलेज नेरचौक चले गए हैं। फिर प्रताप सिंह नेरचौक जा पहुंचा। यहां यह कहकर ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया गया कि हॉस्पिटल में मशीनरी नहीं है।
बाद में फिर से जोनल हॉस्पिटल पहुंचा तो यहां पर ऑपरेशन करने के लिए हां कर दी गई। बीते 6 दिनों से यह दिव्यांग मरीज जोनल हॉस्पिटल मंडी के सर्जीकल वार्ड के बैड नंबर 23 पर दाखिल है। बीती शाम को डॉक्टर ने आज ऑपेरशन करने की बात कही और मरीज को भूखा रहने को कहा। मरीज को आस बंधी की आज उसका ऑपरेशन हो जाएगा। ऑपरेशन से संबंधित सारा सामान उक्त मरीज ले आया। लेकिन, आज सुबह डॉक्टर ने फिर से ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया। प्रताप सिंह ने बताया कि उसके शरीर का अधिकतर भाग दिव्यांग होने के कारण डॉक्टरों ने यह कहकर ऑपरेशन से इनकार कर दिया कि उसे सुन्न कैसे किया जाए। आज डॉक्टर इस मामले पर फिर से विचार-विमर्श करके आगामी कार्रवाई की बात कहकर चले गए। प्रताप सिंह ने बताया कि डॉक्टर पहले से यह जानते थे कि वह शत प्रतिशत दिव्यांग है और ऐसे में उन्हें पहले यह सोचना चाहिए था कि ऑपरेशन होना है या नहीं। यदि समय रहते इनकार कर देते तो वह कहीं और जाकर ऑपरेशन करवाता। उन्होंने बताया कि अब वह हॉस्पिटल से तभी जाएंगे जब उनका ऑपरेशन हो जाएगा। प्रताप सिंह के अनुसार ऑपरेशन करवाने के लिए ही उसने शिमला और मंडी आने-जाने में ही अभी तक 40 हजार से अधिक का खर्चा कर दिया है।
 वहीं, प्रताप सिंह को राज्य सरकार के स्मार्ट कार्ड से भी आपति है। प्रताप सिंह के अनुसार वह यह जानना चाहते हैं कि स्मार्ट कार्ड से किस अस्पताल में कौन सी दवाई मिलती है, क्योंकि उन्हें अपने उपचार के लिए सभी दवाइयां खुद पैसे देकर लानी पड़ रही हैं। वहीं, जब इस बारे में जोनल हॉस्पिटल मंडी के एमएस डॉ. केएस मल्होत्रा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हॉस्पिटल में एक ही सर्जन है, जिस कारण यहां परेशानी आ रही है। पहले यहां पर मेडिकल कालेज के सर्जन भी सेवाएं दे रहे थे, यदि मरीज को मेडिकल कॉलेज के सर्जन ने ऑपरेशन के लिए कहा था तो मरीज उसी चिकित्सक के पास जा सकता है। इसी कारण मरीज को मेडिकल कॉलेज ऑपरेशन करवाने के लिए जाने को कहा गया था।

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