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जयंती विशेष : ऊर्जा के प्रतीक भगवान हनुमान

जयंती विशेष : ऊर्जा के प्रतीक भगवान हनुमान

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Hanuman Jayanti : हनुमान भगवान राम में अपनी गहरी आस्था के कारण पूजे जाते हैं। हनुमान जयंती के दिन सभी हनुमान मंदिरों में बहुत अधिक भीड़ हो जाती है, क्योंकि लोग सुबह पवित्र स्नान करने के बाद से ही इनकी पूजा करना शुरू कर देते हैं। हनुमान जयंती हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा हिन्दुओं के एक महत्वपूर्ण त्योहार के रूप में बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाई जाती है। यह एक महान हिन्दू उत्सव है, जो सांस्कृतिक और परंपरागत तरीके से मनाया जाता है। लोग हनुमान जी की पूजा आस्था, जादुई शक्तियों, ताकत और ऊर्जा के प्रतीक के रूप में करते हैं। लोग हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, क्योंकि यह बुरी शक्तियों का विनाश करने और मन को शान्ति प्रदान करने की क्षमता रखती है। इस दिन हनुमान भक्त सुबह जल्दी नहाने के बाद भगवान हनुमान जी के मंदिर जाते हैं और हनुमान जी की मूर्ति पर लाल सिंदूर चढ़ाते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, लडडू का प्रसाद चढ़ाते हैं, मंत्रों का जाप करते हुए आरती करते हैं, मंदिर की परिक्रमा आदि बहुत सारी रस्में करते हैं।

Hanuman Jayanti : भगवान शिव का 11वां रुद्र अवतार

हनुमान जी का जन्म वानर समुदाय में था, इसी कारण सभी हनुमान मंदिरों में लाल-नारंगी रंग की हनुमान जी की मूर्ति होती है। पूजा के बाद, लोग अपने  माथे पर प्रसाद के रूप में लाल सिंदूर को लगाते हैं और हनुमान जी से मांगी गई अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए लोगों को लड्डू के प्रसाद का वितरण करते हैं। प्रभु हनुमान वानर समुदाय से थे और हिन्दू धर्म के लोग हनुमान जी को एक दैवीय जीव के रूप में पूजते हैं।हनुमान अवतार को महान शक्ति, आस्था, भक्ति, ताकत, ज्ञान, दैवीय शक्ति, बहादुरी, बुद्धिमत्ता, निःस्वार्थ सेवा-भावना आदि गुणों के साथ भगवान शिव का 11वां रुद्र अवतार माना जाता है। इन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान श्री राम और माता सीता की भक्ति में लगा दिया और बिना किसी उद्देश्य के कभी भी अपनी शक्तियों का प्रदर्शन नहीं किया। हनुमान भक्त हनुमान जी की प्रार्थना उनके जैसा बल, बुद्धि, ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए करते हैं।


हनुमान मंत्र:

मनोजवं मारुततुल्यवेगम्
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्री रामदूतं शरणं प्रपद्ये।।

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