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भाईचारे का त्योहार लोहड़ी

भाईचारे का त्योहार लोहड़ी

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लोहड़ी का संबंध कई ऐतिहासिक कहानियों से जोड़ा जाता है। पर इन सब में प्रमुख कहानी दुल्ला भट्टी की है जो पंजाब का रॉबिन हुड कहा जाता है। जुल्म के खिलाफ संघर्ष और मानवता की सेवा के संदर्भ में दुल्ला भट्टी की कहानी अमर हो गई है। अग्निपूजन और सूर्य का स्वागत इन सब का मिलाजुला प्रतीक है लोहड़ी का पर्व। कुछ भी हो, लेकिन लोहड़ी रिश्तों की मधुरता, सुकून और प्रेम का प्रतीक है। दुखों का नाश, प्यार और भाईचारे से मिलजुल कर नफरत के बीज का नाश करने का नाम है लोहड़ी। यह पर्व, लोहड़ी की रात परिवार और सगे-सबंधियों के साथ मिल बैठ कर हंसी-मजाक, नाच-गाना कर रिश्तों में मिठास भरने और सद्भावना से रहने का संदेश देता है। लोहड़ी की महत्ता आज भी बरकरार है, उम्मीद है कि पवित्र अग्नि का … यह त्योहार मानवता को सीधा रास्ता दिखाने और रूठों को मनाने का जरिया बनता रहेगा।


सुंदर मुंदरिये! …हो

हड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से भी जोड़ा जाता है। यही नहीं, लोहड़ी के गानों का केंद्र भी दुल्ला भट्टी को ही बनाया जाता है। दुल्ला भट्टी मुगल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उसे पंजाब के नायक की उपाधि से स मानित किया गया था! उस समय संदल बार की जगह पर लड़कियों को गुलामी के लिए बल पूर्वक अमीर लोगों को बेचा जाता था । दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत लड़कियों को न केवल मुक्त करवाया बल्कि उनकी शादी करवाई और उनकी शादी की सभी व्यवस्था भी करवाई। दुल्ला भट्टी एक विद्रोही था और उसके पूर्वज पिंडी भट्टियों के शासक थे जो कि संदल बार में था अब संदल बार पकिस्तान में स्थित है।

अग्नि पूजन :

जैसे होली जलाते हैं, उसी तरह लोहड़ी की संध्या पर होली की तरह लकडिय़ां एकत्रित करके जलाई जाती हैं और तिलों से अग्नि का पूजन किया जाता है। इस त्योहार पर बच्चों के द्वारा घर-घर जाकर लकडिय़ां एकत्र करने का ढंग बड़ा ही रोचक है। बच्चों की टोलियां लोहड़ी गाती हैं, और घर-घर से लकडिय़ां मांगी जाती हैं। वे एक गीत गाते हैं, जो कि बहुत प्रसिद्ध है —

सुंदर मुंदरिये! ………………हो
तेरा कौन बेचारा, ……………..हो
दुल्ला भट्टी वाला, ……………हो
दुल्ले धी व्याही, ………………हो
सेर शक्कर आई, ……………..हो
कुड़ी दे बाझे पाई, ……………..हो
कुड़ी दा लाल पटारा, ……………हो
यही गीत गाकर सब दुल्ला भट्टी को याद करते हैं।

इस दिन सुबह से ही बच्चे घर-घर जाकर गीत गाते हैं तथा प्रत्येक घर से लोहड़ी मांगते हैं। यह कई रूपों में उन्हें प्रदान की जाती है। जैसे तिल, मूंगफली, गुड़, रेवड़ी व गजक। दुल्ला भट्टी पंजाब का रॉबिनहुड कहा गया है और गीत भी इसीलिए उसकी प्रशंसा में गाए जाते हैं क्योंकि दुल्ला भट्टी अमीरों को लूटकर, निर्धनों में धन बांट देता था।

अलाव जलाने का शुभकार्य

सूर्य ढलते ही खेतों में बड़े-बड़े अलाव जलाए जाते हैं। घरों के सामने भी इसी प्रकार का दृश्य होता है। लोग ऊंची उठती अग्नि शिखाओं के चारों ओर एकत्रित होकर, अलाव की परिक्रमा करते हैं तथा अग्नि को पके हुए चावल, मक्का के दाने तथा अन्य चबाने वाले भोज्य पदार्थ अर्पित करते हैं। ‘आदर आए, दलिदर जाए। इस प्रकार के गीत व लोकगीत इस पर्व पर गाए जाते हैं। यह एक प्रकार से अग्नि को समर्पित प्रार्थना है। जिसमें अग्नि भगवान से प्रचुरता व समृद्धि की कामना की जाती है। परिक्रमा के बाद लोग मित्रों व संबंधियों से मिलते हैं। शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है तथा आपस में भेंट बांटी जाती है और प्रसाद वितरण भी होता है।

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