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Haryana में जमीन घोटालों पर BJP ने घेरे पूर्व CM

Haryana में जमीन घोटालों पर BJP ने घेरे पूर्व CM

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चंडीगढ़। जमीन घोटालों पर बीजेपी ने पूर्व की कांग्रेस सरकार पर सवाल खडे़ किये हैं। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने कहा है कि ग्वाल पहाड़ी की जमीन पर उठे विवाद पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सीएम मनोहर लाल ने निगम अधिकारियों को डिवीजनल कमीश्नर को अपील लगाने के निर्देश दिए थे, जिस पर डिवीजनल कमीश्नर ने स्टे लगा दिया था। यही कारण है कि जमीन आज भी नगर निगम की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद प्रापर्टी डीलरों की सरकार रही है और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा जमीन घोटाला विशेषज्ञ रहे हैं। हजारों करोड़ रुपये के घोटालों की कांग्रेस सरकार के मुखिया रहे हुड्डा और बडे़ नेताओं को अपने गिरेबां में झांकना चाहिए न की दूसरों पर अंगुली उठानी चाहिए।  पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा ग्वाल पहाड़ी पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुभाष बराला ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में संवेदनशील सरकार है। ग्वाल पहाड़ी की जमीन नगर निगम के नाम है और इसे लेकर जो इंतकाल तोड़ा गया था, उस पर सीएम मनोहर लाल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए निगम अधिकारियों को मामले की अपील डिवीजनल कमीश्नर को करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अपील पर सुनवाई करते हुए डिवीजनल कमीश्नर ने स्टे लगाया, जिसके बाद यह जमीन वर्तमान में भी नगर निगम की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में कांग्रेस के दस साल का कार्यकाल भ्रष्टाचार और घोटालों के मामले में नंबर वन रहा है। जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे से अपने चहेतों की तिजोरियां भरने का काम करने वाली अपनी सरकार पर हुड्डा कभी स्पष्टीकरण देने सामने नहीं आए। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बराला ने कहा कि कांग्रेसी सत्ता के नशे में इतने डूब चुके थे कि दर्जनों घोटालों में उनकी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष भूमिका सामने आ रही है। वर्ष 2005 में असोसिऐटेड जर्नल्स लिमिटेड को पंचकुला में प्राइम लोकेशन पर नियमों को ताक पर भूखंड पुनः आबंटित करने का मामला हो, गुरुग्राम की शिवदास मल कालड़ा की 1 बीघा 7 बिस्वा जमीन को 2005 में कोर्ट के आदेश के अवहेलना करके नियमों को ताक पर रख कर रिलीज करने का मामला हो और चाहे राबर्ट वाड्रा. डीएलएफ लैंड डील मामला। सारे तथ्य जनता के सामने हैं।


 उन्होंने कहा कि किसानों की बेशकीमती जमीन को कोड़ियों के भाव बिल्डरों को देने के लिए जो खेल खेला गया, उसने किसानों को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया। किसानों को जमीन अधिग्रहण का डर दिखाकर सेक्शन चार लगाकर बिल्डरों को जमीन खरीदने का अवसर दिया जाना और उसके बाद उस जमीन पर सेक्शन चार हटा कर हुड्डा सरकार ने 10 हजार एकड़ बेशकीमती जमीन को बिल्डरों के कब्जे में ला दिया। इससे बिल्डरों और सत्ता के दलालों ने मिलकर अरबों के वारे-न्यारे किए। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम और इसके आसपास इलाकों में टाउन कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट की ओर से 26 अक्टूबर 2014 से पहले जो लाइसेंस दिए गए हैं,  उनमें ज्यादातर तब के हैं, जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा सीएम थे।

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