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पर्वतों पर मस्तिष्क रेखा

पर्वतों पर मस्तिष्क रेखा

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हस्तरेखा के अनुसार मस्तिष्क रेखा का कोई एक उद्गम स्थान नहीं है। यह अलग-अलग स्थानों से निकलती है और उस स्थान को अपना प्रभाव देती हुई आगे चली जाती है। जीवन और मस्तिष्क रेखा का आपस में गहरा संबंध है। जितना महत्व हृदय रेखा का है उतना ही महत्व मस्तिष्क रेखा का है। यदि मस्तिष्क रेखा कहीं भी विकृत हुई तो व्यक्ति का पूरा जीवन बर्बाद हो जाता है। इसके उद्गम स्थान निम्न हैं …

  • यह जीवन रेखा के उद्गम स्थान से निकल कर जीवन रेखा को ही काटती हुई दूसरे छोर पर जा कर समाप्त हो जाती है। इस रेखा को शुभ नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह दुर्घटना का संकेत देती है। ऐसा व्यक्ति कमजोर होता है, बात-बात पर क्रोधित हो जाता हैऔर दूरदर्शी न होने के कारण अपना ही अहित कर बैठता है। उसके मित्रों की संख्या कम होती है और जो होते भी हैं वे वक्त पडऩे पर उसका साथ नहीं देते।
  • rekhaदूसरे प्रकार की मस्तिष्क रेखा, जीवन रेखा के उद्गम स्थान से निकल कर हथेली के मध्य में जाकर समाप्त हो जाती है। ऐसी रेखा जिसके हाथ में होती है वह अपने जीवन में महत्वपूर्ण पद प्रप्त करता है। वह अवसर को खूब पहचानता है और उसके कार्यों में पूर्ण सामंजस्य रहता है। वह समय पडऩे पर सही निर्णय लेता है तथा कुशाग्र बुद्धि का होने के कारण यात्राओं के माध्यम से बड़ी सफलता अर्जित करता है।
  • तीसरे प्रकार की मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा के साथ चलती हुई आगे चल कर अपना रास्ता अलग बना लेती है। ऐसी रेखा जिनके हाथ में होती है वे प्रबल आत्मविश्वासी होते हैं। अपने पुरुषार्थ के बल पर ही वे सफलता पाते हैं तथा उनके एक से अधिक आय के स्रोत होते हैं।
  • चौथे प्रकार की मस्तिष्क रेखा, जीवन रेखा के पास से निकलकर हथेली को दो भागों में बांटती हुई दूसरे छोर पर समाप्त हो जाती है। ऐसी रेखा वाले को कई बार विदेश यात्रा का अवसर मिलता है। वह विदेश में जाकर व्यापार भी कर सकता है और पूर्ण सफलता अर्जित करता है।
  • किसी-किसी हथेली में मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा आपस में मिलती हुई चलती हैं। ऐसी रेखा वाला व्यक्ति कठोर, निर्दयी तथा हृदयहीन होता है। अपराधियों और हत्यारों के हाथ में ऐसी रेखा देखी गई है। हां, अगर ऐसी मस्तिष्क रेखा से निकल कर कोई रेखा गुरु पर्वतकी ओर जा रही हो तो वह कलाकारया साहित्यकार होता है तथा बहुत योजनाबद्ध ढंग से काम करने वाला बुद्धिमान व्यक्ति होता है।
  • rekha2मस्तिष्क और जीवन रेखा का उद्गम अलग-अलग हो तो व्यक्ति स्वच्छंद प्रकृति का होता है तथा वह किसी के दबाव में कार्य नहीं करता।
  • हथेली में नीचे जाकर झुकने वाली रेखा वाला व्यक्ति धन का अधिक मोह रखता है वह ऐश-ओ-आराम चाहता है परंतु परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं।
    गौरतलब है कि मस्तिष्क रेखा जिस पर्वत को छूती है उसे अपना प्रभाव दे जाती है। गुरु पर्वत पर जाए तो ज्ञानी या साहित्यकार बनाती है, शनि पर्वत पर जाए तो दार्शनिक या चिंतक बनाती है। सूर्य पर्वत पर जाए तो उच्च पद देती है और बुध पर्वत पर जाए तो सफल व्यापारी बनाती है। चंद्र पर्वत पर इसकी स्थिति जलयात्रा के अवसर देती है साथ ही ऐसा व्यक्ति तंत्र क्षेत्र में बहुत आगे होता है।
  • चंद्र पर्वत से घूम कर यह मणिबंध पर जाए तो व्यक्ति दरिद्र होता है, परंतु अंतिम छोर पर दो हिस्सों में बंट जाए तो धन,सुख तथा वैभव से पूर्ण सफल बनाती है। मंगल रेखा पर यह पुष्ट हो और अंत में त्रिकोण हो तो वह व्यक्ति किसी की हत्या कर देता है। मस्तिष्क रेखा के अंत में क्रॉस हो तो व्यक्ति वृद्धावस्था में पागल होता है। जिस भी स्थान पर यह हृदय रेखा को काटती है स्वास्थ्य की हानि ही करती है।
  • दोहरी मस्तिष्क रेखा वाला व्यक्ति अत्यंत बुद्धिमान, भाग्यवान, कूटनीतिक और जीवन में पूर्ण सफल होता है। मस्तिष्क रेखा दोषमुक्त और स्पष्ट है तो चुंबकीय प्रभाव देती है साथ ही यह अगर घूमकर शुक्र पर्वत पर जाकर समाप्त होती है तो व्यक्ति महिलाओं में अधिक लोकप्रिय होता है। मस्तिष्क रेखा पर क्रॉस, नक्षत्र दुर्घटना, सिर की चोट और मृत्यु के सूचक हैं। अगर यह भाग्यरेखा के आसपास जा कर समाप्त हो जाती है तो 25 साल से ही पहले मृत्यु का संकेत देती है।

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