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आसान नहीं पंगवाल होना, घाटी में बर्फ की बंदी बनी जिंदगी, देखें वीडियो

शेष विश्व से टूटा सड़क संपर्क, हिमस्खलन का खतरा भी बढ़ा, प्रशासन ने जारी की चेतावनी

आसान नहीं पंगवाल होना, घाटी में बर्फ की बंदी बनी जिंदगी, देखें वीडियो

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पुनीत शर्मा, चंबा। जिले की पांगी घाटी नए साल की दूसरी बर्फबारी के साथ ही बर्फ की गिरफ्त में है। उधर, भारी बर्फबारी तथा हिमस्खलनों के अंदेशे से स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों को घरों से बाहर न निकलने तथा जहां हैं,  वहीं रहने की हिदायत जारी कर दी है।
एक और जहां घाटी में ढाई से 3 फुट बर्फबारी हो चुकी है तो वहीं अब भी बर्फ गिरने का क्रम जारी है। ज़ाहिर है ऐसे में मुश्किलें ओर बढ़ेंगी। इस बर्फबारी से पांगी घाटी को वाया गुलाबगढ़- किश्तवाड़- पठानकोट मार्ग भी बंद होने से घाटी शेष विश्व से पूरी तरह कट गई है। भारी बर्फबारी के कारण लोगों को घरों में ही कैद होना पड़ गया है। इस हिमपात से घाटी में हिमस्खलन होने का खतरा भी बढ़ गया है। घाटी के ऊपरी इलाकों में गत सितंबर माह से जमा हो रही बर्फ टूट कर निचले इलाकों के तरफ आ जाती है। इसके कारण लोगों को भारी खतरों का सामना करना पड़ता है।

पांगी घाटी में हिमपात जारी

पहली बर्फबारी से परिवाहन निगम की बस सेवाएं बंद होने के बाद  टैक्सी वाहनों के चलने से लोगों को यातायात सुविधाएं मिल रही थीं तो वहीं भारी बर्फबारी से अब वो राहत भी नहीं मिल पा रही।  ऐसे ही अगर बर्फ़बारी होती रही तो लोगों को बिजली पानी समेत कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित होने का डर सताने लगा है। खबर लिखे जाने तक घाटी में हिमपात जारी था। उधर, कार्यकारी आवासीय आयुक्त पांगी बी भारती ने लोगों से अनुरोध किया है कि लोग मौसम को साफ होते तक घरों से बाहर न निकले जो जहां हैं, वहीं पर रहे।

6 पंचायतों की करीब पचीस हजार लोगों को हो रही मुश्किल

जनजातीय ब्लॉक पांगी के16 पंचायतों की करीब पचीस हजार लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
31 दिसबंर से आज तक मौसम लगातार खराब होने के कारण शीतलहर का प्रकोप जारी है। इससे  पशुओं के लिए चारे की भी समस्या हो सकती है। जनजातीय क्षेत्र पांगी में इस साल का जनवरी के महीने में भारी ठंड का सामना करना पड़ रहा है। गत सितंबर माह से पांगी में मौसम के बदलते रुख के कारण स्थानीय लोगों को कई प्रकार के नुकसान हुए सेब, मटर, आलू समेत कई फैसले बर्फ के चपेट में आने से करोड़ों का नुकसान हुआ। अक्टूबर, नवंबर व दिसंबर माह में भी हिमपात होता रहा।
जनवरी माह का यह दूसरा हिमपात है, जिस से जहां स्थानीय निवासियों को ठंड का सामना करना पड़ रहा है, वहीं उन को अपने पशुधन की चिंता भी सता रही है। करीब चार माह पहले से पांगी पशु को चारा डालना पड़ा रहा है। स्थानीय लोगों शाम सिंह, देवी सिंह, करतार सिंह, भीम राम, तेज सिंह, अंगमो गेल चंद, हेमा व  मालनी जोग सिंह का कहना है कि इस बार के सालों के बाद मौसम ने अपना रुख बदला हुआ है।
पिछले कई वर्ष से कम हिमपात होने के कारण लोग पशु धन के लिए चारा कम इकट्ठा करते थे। लोगों को यह विश्वास था कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण पहाड़ों में भी बर्फबारी कम हो रही है। बर्फ न होने के कारण पशुओं को जंगलों में चरने के लिए छोड़ा जाता है, जिससे घरों में चारा कम लगता है। पांगी में सरकार की चारा उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था न होने से लोगों को आपस में ही एक दूसरे का सहयोग करना पड़ता है।

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