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माफी को अवमानना याचिका में बचाव के लिए नहीं बना सकते हथियारः हाईकोर्ट

माफी को अवमानना याचिका में बचाव के लिए नहीं बना सकते हथियारः हाईकोर्ट

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शिमला। हाईकोर्ट (High Court) ने यह स्पष्ट किया कि मात्र न्यायालय के समक्ष बिना शर्त माफी मांगने पर न्यायालय (Court) के आदेशों की अनुपालना न करने के दोष से नहीं बच सकते। बिना शर्त माफी को अवमानना याचिका में बचाव के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने तत्कालीन सहकारिता सचिव अनिल कुमार खाची व रजिस्ट्रार बीर सिंह ठाकुर के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाई जाए।


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न्यायाधीश संदीप शर्मा ने जर्म सिंह व अन्यों द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान यह पाया कि प्रथम दृष्टया इनके खिलाफ अवमानना का मामला बनता है और कानून के सिद्धांतों के मुताबिक उन्हें दंडित किए जाने से पूर्व कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना अति आवश्यक है। ताकि यह अपने बचाव में न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रख सके। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थियों ने पंजाब पैटर्न के आधार पर उन्हें इंस्पेक्टर (Inspector) ग्रेड 2 से इंस्पेक्टर (Inspector) ग्रेड 1 में तब्दील किए जाने व वरिष्ठता का लाभ दिए जाने बाबत न्यायालय के समक्ष मामला दायर किया था।

हाईकोर्ट के एकल पीठ ने न्यायालय के समक्ष सह सचिव सहकारिता द्वारा दायर अनुपूरक शपथ पत्र के आधार पर याचिका का निपटारा कर दिया था जिसमें कि 1 जून 1996 को जारी अधिसूचना के मुताबिक इंस्पेक्टर (Inspector) ग्रेड 2 को इंस्पेक्टर (Inspector) ग्रेड 1 में तब्दील करने के लिए 1 जुलाई 1995 की बजाए तारीख 1 अगस्त 1995 निर्धारित की गई थी। इसके अलावा शपथ पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया था कि उनकी वरिष्ठता लिपिकों व इंस्पेक्टरों (Inspector) के बीच लेंथ ऑफ सर्विस के आधार पर तय की जाएगी।

प्रार्थियों ने अपनी याचिका में यह आरोप लगाया है कि सहकारिता विभाग ने लिपिक के पदों से पदोन्नत हुए इंस्पेक्टरों (Inspector) को एकल पीठ द्वारा पारित फैसले व सह सचिव द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष दायर किए शपथ पत्र के विपरीत वरिष्ठता सूची में उनके उपर स्थान दे दिया, जोकि अपने आप में हाईकोर्ट (High Court) के आदेशों की अवमानना को दर्शाता है। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात सहकारिता विभाग के सचिव व रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर अपना पक्ष 25 नवंबर तक न्यायालय के समक्ष रखने के आदेश जारी किए हैं।

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