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फर्जी Fashion Design संस्थान के मैनेजर की जमानत याचिका रद

फर्जी Fashion Design संस्थान के मैनेजर की जमानत याचिका रद

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High Court :शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट ने धर्मशाला के एक फर्जी संस्थान के मैनेजर को जमानत याचिका रद कर दी है। हाईकोर्ट ने धर्मशाला कोर्ट के एक न्यायिक दंडाधिकारी के खिलाफ प्रशासनिक तौर पर High Courtउचित कार्रवाई हेतु मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने के आदेश जारी किए। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने फर्जी शिक्षण संस्थान के मैनेजर को दी गई जमानत के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किए हैं।

High Court :हाईकोर्ट ने मैजिस्ट्रेट को भी लगाई फटकार

हाईकोर्ट ने कहा कि मैजिस्ट्रेट ने आरोपी को जमानत प्रदान करते हुए यह भी नहीं देखा कि उसकी जमानत याचिका हाईकोर्ट ने चार दिन पहले ही खारिज कर दी थी। ज्ञात रहे कि पिछले वर्ष कोर्ट ने धर्मशाला में चल रहे इंटरैक्टिव फैशन डिजाइनिंग नाम के संस्थान के मैनेजर रवि कुमार की जमानत याचिका खारिज की थी। इसी के तहत उसके खिलाफ धोखाधड़ी के मामले की जांच कर रहे अधिकारी को भी तुंरत बदल कर मामले की जांच सीआईए को सौंपने के आदेश दिए थे।


कोर्ट ने सीआईए को दिए थे मामले की जांच सौंपने के आदेश

कोर्ट ने जांच अधिकारी को फटकारते हुए कहा था कि यह अधिकारी 5 दिसम्बर 2015 को दर्ज प्राथमिकी में अभी तक जरूरी जानकारी जुटाने में विफल रहा। कोर्ट ने कहा था कि जितनी देरी जांच में होती है उतने ही सबूत मिटते जाते हैं इसलिए कोर्ट ने यह जांच सीआईए को सौंपने के आदेश जारी किए थे। कोर्ट ने संस्थान के मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश राणा के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए थे।

आरोपी मैनेजेर के खिलाफ 420 के तहत दर्ज है मामला

मामले के अनुसार धर्मशाला स्थित इंटरैक्टिव फैशन डिजाइनिंग के मैनेजर रवि कुमार के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420 के तहत 5 दिसम्बर 2015 को धर्मशाला पुलिस स्टेशन के समक्ष आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।

जांच के दौरान पाया गया कि इंटरैक्टिव फैशन डिजाइनिंग संस्थान न तो कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड है न ही एक्सेलसियर इंटरैक्टिव सोलूशन्स प्राइवेट लिमिटेड से। जांच में यह भी पाया गया कि 69 छात्रों ने इंटरैक्टिव फैशन डिजाइनिंग संस्थान में दाखिला लिया था। आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि इन्होंने दाखिले के नाम पर लाखों रुपया ऐंठ लिया जबकि उनका संस्थान क़ानूनी तौर पर एफिलिएटेड नहीं है।

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