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हिमाचल: 65 साल के शख्स को सपने में दिखा शिव मंदिर, 39 साल से अकेले बनाने में जुटे

हिमाचल: 65 साल के शख्स को सपने में दिखा शिव मंदिर, 39 साल से अकेले बनाने में जुटे

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हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) आने वाले ज्यादातर पर्यटक खूबसूरत और जाने माने पर्यटन स्तहलों पर घूम कर वापस लौट जाते हैं, लेकिन ज़्यादातर को छैल स्थित पत्थरों से बने कुंभ शिव मंदिर (Shiv Temple) के बारे में पता नहीं है। यह पत्थर लोगों की भीड़ से दूर एकांत में स्थित है। मंदिर की खास बात यह है कि इसे एक अकेले इंसान ने 39 साल में बनाया है, वह भी इसका सपना आने के बाद। 65 साल के सत्य भूषण ने अपनी पैतृक जमीन पर 1980 में मंदिर का निर्माण शुरू किया था। मंदिर को ‘टेंपल इन माई ड्रीम’ का नाम दिया गया है जो मंदिर के ऊपर तारों से लिखा गया है।


सीमेंट और मेटल के तारों से बनाए गए मंदिर में किसी रंग का इस्तेमाल नहीं किया गया है। शिव की जटाओं से लेकर नाग तक सब कुछ ग्रे सीमेंट से बनाया गया है। मंदिर के नीचे एक गुफा भी है। भूषण बताते हैं कि उन्होंने अपने स्कूल के दिनों में लकड़ी और मिट्टी से आकृतियां बनाना सीखा था। वह कहते हैं कि उनके सपने ने उन्हें एक प्लैटफॉर्म दिया और मंदिर बनाने के लिए प्रेरित किया।

ऐसे करते हैं आकर्षित

पहले इस मंदिर को केवल स्थानीय लोग जानते थे। उन्होंने इसके लिए फंड जुटाया। अभी तक इस पर 15 लाख रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं। अभी भी इसका निर्माण पूरा नहीं हुआ है। भूषण अपनी पत्नी से अलग अपनी बहन के परिवार के साथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर रहते हैं। वह बताते हैं, ‘जैसे ही मुझे कोई मंदिर जाता हुआ दिखता है, मैं बिजली चालू कर देता हूं। शिव की मूर्ति से किसी झरने की तरह पानी बहने लगता है और शिव भजन बजने लगते हैं।’ वह बताते हैं कि केवल बिजली के कनेक्शन के लिए उन्होंने एक स्थानीय की मदद ली।

मुस्कान और तारीफें करती हैं प्रेरित

हर दिन मूर्ति पर चार घंटे का समय लगाने वाले भूषण सरकारी मदद की चाहत नहीं रखते। हालांकि, वह हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के घर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पांच फीट ऊंची मूर्ति बनाने का दावा करते हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि 38 साल बाद भी उन्हें मंदिर बनाने के लिए क्या प्रेरित करता है, वह बताते हैं कि जब कोई मंदिर में दर्शन करके वापस जाता है, तो उसके चहरे की मुस्कान और तारीफें उन्हें प्रेरित करती हैं। भूषण कहते हैं कि उन्हें हाल ही में पता चला कि उनके मंदिर को गूगल पर लोकेट कर सकते हैं। वह इसे लेकर बहुत खुश हैं और सोशल मीडिया पर अपलोड की गई तस्वीरों को धन्यवाद देते हैं।

 

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