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वीरभद्र सिंह के शब्दवाण, सुक्खू के चुन-चुनकर प्रहार

वीरभद्र सिंह के शब्दवाण, सुक्खू के चुन-चुनकर प्रहार

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यशपाल शर्मा/शिमला। सीएम वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस के जरनल हाउस में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यप्रणाली को लेकर जमकर गुबार निकाला तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू ने भी उन्हें जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वीरभद्र सिंह ने सबसे पहले संगठनात्मक जिलों पर सवाल उठाए और कहा कि इनके गठन से पहले विचार-विमर्श कर लेना चाहिए था। पहले ही प्रदेश में इतने जिले हैं कि उन्हें चलाना मुश्किल हो रहा है। संगठनात्मक जिले बनने से प्रशासनिक जिलों की मांग भी उठेगी। उन्होंने सचिवों की नियुक्ति पर खूब चुटकियां ली, यहां तक कहा कि हॉल में बैठे लोग दिल पर हाथ रखकर कहें कि कितने लोग चुनकर आए हैं। सचिव या पदाधिकारी बन गए हैं तो ज्यादा इतराए नहीं। जो लोग हवा में तैरने के बाद गिरते हैं, वह कहीं के नहीं रहते।

  • सीएम ने संगठनात्मक जिलों और सचिवों की नियुक्ति पर घेरा
  • मैं सीएम अब मुझे नहीं बनना पीसीसी चीफ
  • सुक्खू बोले, संगठन में चुनाव से ही हुई पधाधिकारियों की नियुक्तियां
  • पुत्र मोह हर किसी को पर विक्रमादित्य कर रहे कड़ी मेहनत

व्यंग्य करते हुए कहा कि सुक्खू जब तक सीएम नहीं बन सकते जब तक मैं हूं, और मैं अध्यक्ष नहीं बनूंगा, अध्यक्ष वह ही रहेंगे। नम्रता और विनम्रता होनी चाहिए। उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर पदाधिकारियों ने कमेंट किए, उन पर क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई। जो उनके खिलाफ षड्यंत्र रचेगा, उसे वह बख्शेंगे नहीं। वे चाहते हैं कि राष्ट्रीय स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक पदाधिकारियों की नियुक्ति चुनाव से होनी चाहिए। वह सुझाव दे रहे हैं, मानना न मानना आपकी मर्जी है। 
sukhuइस पर सुक्खू ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें सत्ता की न लालसा है न इच्छा। उन्होंने संगठन में रहकर संघर्ष ही किया है और आगे भी करेंगे। जो भी पदाधिकारी हैं, वह सब चुने हुए ही हैं। चुनना दो तरह से होता है, एक जैसे सीएम वीरभद्र सिंह परवाणू में चुने गए थे और दूसरा एआईसीसी के संविधान के अनुसार चुनकर आते हैं। पर्यवेक्षकों की बैठक के बाद नियुक्ति का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाता है, जिस पर मुहर के बाद नियुक्ति होती है। हर महीने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय चलाने पर लगभग पांच लाख खर्च आता है। उन्हें बने पौने चार साल हो गए हैं। चाहे  सीएम हों या मंत्री या कोई और किसी से एक रुपया नहीं लिया। पुत्र मोह हो सकता है, सबको होता है। लेकिन वह विक्रमादित्य सिंह की तारीफ करते हैं कि वह अच्छा काम कर रहे हैं। पार्टी को युवा शक्ति की भी जरूरत है। विक्रमादित्य कर्मठ हैं। सुक्खू ने सीएम को भगवान बचाए इस कांग्रेस के बयान पर भी घेरा। उन्होंने कहा कि इससे पार्टी को नुकसान हुआ। टीवी पर इसे बार-बार दिखाया गया।

सुक्खू ने कहा कि जिस भी पदाधिकारी ने सीएम के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी की है, उसके विरुद्ध कार्रवाई करेंगे। इस पर अंबिका सोनी ने भी सीएम को आश्वस्त किया कि जो सुक्खू कह रहे हैं, उसे लेकर वह भी पूरा आश्वासन देती हैं।

अंबिका सोनी की सुक्खू को हरी झंडी

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के जरनल हाउस में राजनीतिक पारा चरम पर रहा। बैठक की कार्यवाही शुरू होते ही कसीदे कढ़ने से लेकर तंज कसने और दिलो-दिमाग का गुबार व खुमार निकालने का क्रम शुरू हो गया था, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, कार्यक्रम सियासी रंग पकड़ता गया। कुछ सिपहसलारों से अपने-अपने आकाओं की तारीफों के खुलकर पुल बांधे तो कुछ ने नपी-तुली बात कर संगठन और सरकार को सुझाव दिए।

  • cong1जरनल हाउस में बोलीं, किसी को भी बदलना दो मिनट का काम 
  • बदलना न हल, न उद्देश्य, लक्ष्य 2017 के लिए मिलकर करो काम
  • अंबिका सोनी ने कहा कि टिकट आवंटन में नहीं चलेगा कोई कोटा

अंत में मौका कांग्रेस प्रभारी अंबिका सोनी का था, उन्होंने न केवल प्रदेश नेतृत्व में संतुलन साधा, बल्कि सीएम वीरभद्र सिंह के अनुभव और सुक्खू के काम के साथ ही अन्य वरिष्ठ नेताओं के उदाहरण भी दिए। अंबिका ने कहा कि वह सुक्खू के प्रबंधन व धैर्य की तारीफ़ करती हैं। आम सभा कोई पिक एंड चूज नहीं हुआ। उन्होंने सीएम की बातों का संयम से जवाब दिया। यहां बैठे किसी भी व्यक्ति को पद से बदलना दो मिनट क्या दो सेकेण्ड का काम है। लेकिन बदलने से कुछ नहीं होगा। बदलना न उद्देश्य है, न ही हल। लक्ष्य 2017 है और उसके लिए सभी मिलकर काम करेंcongसुक्खू संगठन में बेहतर कार्य कर रहे हैं। उन्हें पीसीसी में युवाओं की तादात देखकर खुशी हुई। काफी लोगों को बोलने का मौका नहीं मिला, सुक्खू ने कहा है कि अगला जरनल हाउस जल्द ही धर्मशाला में किया जाएगा। वह आने को तैयार हैं। वीरभद्र सिंह सरकार ने बहुत अधिक काम प्रदेश में किया है। उसे घर-घर तक पहुंचाया जाए। 25 दिसंबर को सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं। उस पर भव्य कार्यक्रम के लिए अभी से जुट जाएं, जो काम अधूरे हैं, उन्हें पूरा करें।

वीरभद्र सिंह के अनुभव का संगठन पूरा लाभ उठाए। सीएम को पार्टी व कार्यकताओं के फीडबैक, प्रदेश अध्यक्ष को संकल्प और हमें तालमेल व सहयोग की जरूरत है। मिशन रिपीट कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि टिकट आवंटन में कोई कोटा नहीं चलेगा। चाहे कोई वीरभद्र सिंह, आशा कुमारी, कौल सिंह या फिर सुक्खू का समर्थक हो। वह भी संगठन में ब्लॉक से राष्ट्रीय स्तर तक चुनाव से नियुक्तियों के पक्ष में हैं।

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