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हिमाचल हाईकोर्ट ने खारिज की केसीसी बैंक घोटाले के 7 आरोपियों की जमानत याचिका

10 दिसंबर, 2021 को ऊना में 19.50 करोड़ के घोटाले को लेकर दर्ज हुई थी एफआइआर

हिमाचल हाईकोर्ट ने खारिज की केसीसी बैंक घोटाले के 7 आरोपियों की जमानत याचिका

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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (Himachal High Court) ने कांगड़ा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में हुए 19.50 करोड़ के लोन घोटाले (Scam) के 7 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ ने शिवम सेठ, चेतन नेगी, सुनीता सेठ, प्रकाश चंद राणा, योगराज, करनैल सिंह राणा व लेखराज की जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं की कस्टोडियल इंटेरोगेशन किया जाना अति आवश्यक है। उनकी कस्टोडियल इंटेरोगेशन केवल बैंक के हित के लिए ही नही बल्कि उन लोगों के हित के लिए भी आवश्यक है जिन लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई बैंक के पास जमा कर कर रखी थी। 10 दिसंबर, 2021 को कांगड़ा सेंट्रल को ऑपरेटिव बैंक ऊना में 19 करोड़ 50 लाख रुपए के घोटाले के संबंध में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन (State Vigilance and Anti Corruption) ब्यूरो ने ऊना में एफआइआर (FIR) दर्ज की है।

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यह एफआईआर एक आईएएस अधिकारी सहित कुल 16 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई है। आरोप है कि कांगड़ा सेंट्रल को ऑपरेटिव बैंक ऊना (Kangra Central Co Operative Bank Una) ने सब नियमों को ताक पर रखते हुए पंजाब की मैसर्ज यू आर सिंटर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को लोन दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि जिस मेसर्स यूआर सिंटर प्राइवेट लिमिटेड फर्म को 19.50 करोड़ का लोन जारी किया गया, उसने स्कूटर के नंबर वाले वाहनों से लाखों रुपये का सामान ढोने की जानकारी बैंक को दी थी। जांच में इस बात की तस्दीक भी हुई है कि यूआर सिंटर फर्म ने पंजाब में पंजीकृत दो वाहनों से करीब 60 लाख रुपये की चिमनी की प्लेट और शेड बनाने के लिए माल ढुलाई दिखाई, वह दोनों ही दोपहिया वाहन के नंबर थे।

जांच में इस बात की भी जानकारी सामने आई है कि फर्म ने पंजाब के फगवाड़ा में स्थित जिस मेसर्स मां चिंतपूर्णी इंटरप्राइजेज के नाम दर्ज 24 मई 2015 के 25.15 लाख और 28.17 लाख रुपये के बिल जमा किए, उस फर्म का पंजीकरण ही 25 फरवरी 2016 को निरस्त हो गया था। जिस मदन फाउंड्री वर्क्स को 25 लाख रुपये दिलवाए गए, उसके मालिक ओम प्रकाश ने बताया कि बिक्रम सेठ के कहने पर उन्होंने इस पैसे को मेसर्स बीएल सेठ एग्रो मिल्स लिमिटेड के खाते में वापस कर दिया था। साथ ही 18.23 लाख का एक बिल भी मेसर्स यूआर सिंटर प्राइवेट के नाम पर जारी किया, लेकिन माल की कोई सप्लाई नहीं की। बैंक प्रबंधन को निचले स्तर के अफसरों ने यह भी बताया कि लोन की 1.88 करोड़ की जारी की गई। किश्त से फर्म ने उद्योग लगाने का कोई काम नहीं किया है। लेकिन इसके बाद भी लोन कमेटी के सदस्यों करनैल सिंह राणा, लेख राज कंवर, प्रकाश चंद राणा और योग राज व बैंक की तत्कालीन एमडी राखिल कहलो ने दूसरी किश्त जारी कर दी थी।

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