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10 साल से सजा भुगत रहे दुराचार के दोषी को हाईकोर्ट ने किया बरी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुराचार (Sodomize A Minor) के जुर्म में 10 साल की सजा भुगत रहे दोषी को बरी कर दिया है। अदालत ने दोषी को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने तिब्बती टी सेवांग की अपील को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया।
निचली अदालत ने टी सेवांग को पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत दोषी ठहराया था। इस जुर्म के लिए निचली अदालत ने उसे 10 साल के कठोर करावास की सजा के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। इस निर्णय के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि निचली अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष अभियोग साबित करने में नाकाम रहा है। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी ने 23 फरवरी 2014 को 11 साल के बच्चे के साथ दुराचार किया है। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की।
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हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी की उम्र 37 वर्ष और पीड़ित की उम्र 11 वर्ष थी। पीड़ित की चिकित्सा जांच (Medical test) घटना के दिन ही हुई थी और चिकित्सा जांच में दुराचार के बारे में कोई राय नहीं थी। अदालत ने कहा कि इतने छोटे समय में दुराचार के घाव नहीं भर सकते हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी को तब तक दोषी नहीं ठहराया जा सकता है, जब तक उसके खिलाफ पुख्ता सुबूत न हो। अदालत ने निचली अदालत के निर्णय को निरस्त्र करते हुए आरोपी की अपील को स्वीकार किया।
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