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ब्रेकिंगः ट्राइबल, दुर्गम क्षेत्रों में सेवारत सरकारी कर्मचारियों को हाईकोर्ट से राहत 

ट्राइबल को दुर्गम क्षेत्रों में रिलीवर की पॉलिसी को ठहराया गैरकानूनी

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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों को राहत देते हुए प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई ट्राइबल को दुर्गम क्षेत्रों में रिलीवर की पॉलिसी को गैरकानूनी ठहरा दिया है। कोर्ट ने कहा कि रिलीवर खोजने की जिम्मेदारी सम्बंधित अथॉरिटी की है न की ट्राइबल में सेवाएं देने वाले कर्मी की। प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि ट्राइबल व दुर्गम क्षेत्रों में अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा करने वाले सरकारी कर्मचारियों को ट्रांसफर करने के मामले में सब्सिट्यूट जैसी शर्त लगाकर लंबे समय तक वहीं रहने को बाध्य करने को कानूनी तौर पर गलत है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस मोहन गोयल की बेंच ने टीजीटी नॉन मेडिकल राजेश कुमार, सुनील कुमार व राजेंद्र कुमार द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। बता दें कि राजेश कुमार, सुनील कुमार व राजेंद्र कुमार ने निर्धारित कार्यकाल पूरा करने के बाद ऐच्छिक स्कूलों के लिए ट्रांसफर करने के लिए निदेशक प्राथमिक शिक्षा को प्रतिवेदन भेजा था। लेकिन प्रतिवेदन पर कोई फैसला न करने की स्थिति में प्रार्थीयों को प्रशासनिक प्राधिकरण के सामने यह याचिका दायर की थी।
जिसके बाद निदेशक प्राथमिक शिक्षा ने प्रार्थियों के प्रतिवेदन पर कोई फैसला न देते हुए यह आदेश जारी किए थे कि प्रार्थियों के प्रतिवेदन पर तब फैसला लिया जाएगा, जब शिक्षा विभाग के पास पदोन्नति या नई नियुक्ति के कारण रिलीवर उपलब्ध होंगे। अब हाईकोर्ट ने इस फैसले को गलत ठहराते हुए शिक्षा विभाग को आदेश दिए कि वह प्रार्थियों को उनके ऐच्छिक स्कूलों में ट्रांसफर करने के लिए 4 हफ्ते के अंदर रिलीवर मुहैया कराने और उसके एक हफ्ते के भीतर प्रार्थियों को उनके ऐच्छिक स्कूल के लिए ट्रांसफर करने का आदेश दिया है।

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