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Himachal: होटल व्यवसायियों के हाथ खड़े, वर्किंग कैपिटल शून्य-मांगी आर्थिक मदद

प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर लगाई गुहार, वित्त मंत्रालय को भी लिखी पाती

Himachal: होटल व्यवसायियों के हाथ खड़े, वर्किंग कैपिटल शून्य-मांगी आर्थिक मदद

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शिमला। हिमाचल (Himachal) में कोरोना (Corona) की मार होटल व्यवसायियों पर भी पड़ रही है। व्यवसायियों के पास वर्किंग कैपिटल (Working Capital) शून्य हो गया है। ऐसे में टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेक होल्डर्स एसोसिएशन (TOURISM INDUSTRY STAKE HOLDERS ASSOCIATION) ने हिमाचल सरकार को पत्र लिखकर वर्किंग कैपिटल के रूप में आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। वहीं, पर्यटन (Tourism) से जुड़े व्यवसायियों को बैंकों (Banks) से लिए ऋणों की ब्याज तथा किस्तों का भुगतान कर पाना असंभव हो गया है, इसक चलते एसोसिएशन ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय तथा आरबीआई (RBI) के गवर्नर को पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि मौजूदा ऋणों की डिफेरमेंट की जाए तथा ऋणों को एनपीए (NPA) होने से रोका जाए। कोविड (Covid) की दूसरी लहर से हो रहे नुकसान से उबरने के लिए हिमाचल की पर्यटन इंडस्ट्री के लिए एक आर्थिक पैकेज दिया जाए।

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इस वर्ष अच्छा टूरिस्ट सीजन लगने की थी उम्मीद

एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहिंदर सेठ ने बताया कि पिछले साल से कोरोना महामारी से उत्पन्न स्थिति के कारण लगातार दूसरे वर्ष पर्यटन सीजन (Tourist Season) पर्यटन व्यवसायियों के हाथ से खिसकने के कारण अपनी इकाइयों को संचालित रख पाना ना मुमकिन होता जा रहा है। पिछले वर्ष टूरिस्ट सीजन प्रारंभ होने से पहले ही कोरोना महामारी के चलते पर्यटन व्यवसाय प्रभावित हुआ था तथा 6 से 7 महीने तक पर्यटन इकाइयां लॉकडाउन (Lockdown) के चलते संपूर्णता बंद रही थीं। पिछले वर्ष अक्टूबर से थोड़ा बहुत काम चला था, जिससे कुछ ना कुछ खर्चे निकल रहे थे। पर्यटन से जुड़े व्यवसायियों को इस वर्ष अच्छा टूरिस्ट सीजन लगने की उम्मीद जगी थी। इसके मध्य नजर होटलों (Hotel), रेस्टोरेंट्स तथा अन्य पर्यटन इकाइयों की मेंटेनेस पर खर्चा कर आने वाले सीजन की तैयारियां कर ली थीं। पर कोविड कि दूसरी लहर के चलते लगाईं बंदिशों के चलते पर्यटन से जुड़े व्यवसायियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।


आगे का खर्च कैसे वहन होगा सत्ता रही चिंता

उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से कोई आर्थिक मदद ना मिलने के कारण किसी प्रकार से अपनी सेविंग से पैसा खर्च करके तथा जो भी उनके पास सिक्योरिटी (Security) थी, उसके अगेंस्ट बैंकों से ऋण लेकर पूरा वर्ष अपनी इकाइयों तथा अपने खर्चों को पूरा करते रहे, लेकिन अब होटल तथा अन्य पर्यटन से जुड़े व्यवसायियों के पास वर्किंग कैपिटल शून्य हो गया है। अप्रैल माह का वेतन तथा अन्य आवश्यक खर्चों आदि का भुगतान मई में किसी तरह से कर दिया गया, लेकिन वर्किंग कैपिटल शून्य होने के कारण आगे खर्च कहां से वहन होगा, यह सोच सभी उद्यमियों को सत्ता रही है।

बंदिशों के कारण हिमाचल का रुख नहीं कर रहे पर्यटक

अभी कोविड की दूसरी लहर का प्रकोप देश व प्रदेश में कम होने में समय लग सकता है। पर्यटन व्यवसायियों ने अपनी इकाइयां बंद रखी हुई हैं, क्योंकि मौजूदा बंदिशों के कारण ना तो कोई पर्यटक हिमाचल का रुख कर रहा है तथा फूड बिजनेस (Food Business) भी चल पाना मुश्किल है, इसलिए रेस्टोरेंट्स भी बंद पड़े हैं। उन्होंने कहा कि हम सरकार द्वारा कोरोना चैन को तोड़ने के लिए उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करते हैं। यदि इस महामारी से निपटने के लिए बंदिशों की अवधि को एक हफ्ता दस दिन आगे बढ़ाना पड़े तो पर्यटन उद्योग सरकार के साथ खड़ा है, क्योंकि हम सबकी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है। इसके साथ हिमाचल के सबसे बड़े पर्यटन उद्योग जिस पर लाखों लोगों की जीविका आधारित है को भी बचाए रखना जरूरी है। सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) से आग्रह करते है कि शीघ्र अति शीघ्र पर्यटन से जुड़े व्यसायियों को आर्थिक मदद की जाए, ताकि पर्यटन इंडस्ट्री (Tourism Industry) को बचाया जा सके।

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