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BJP का आरोप@ चार साल में 1300 घोषणाएं, 300 ही हुई पूरीं

BJP का आरोप@ चार साल में 1300 घोषणाएं, 300 ही हुई पूरीं

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बद्दी। सीएम वीरभद्र सिंह केवल घोषणा मंत्री बनकर रह गए हैं। इन चार वर्षों में की गई 1300 घोषणाओं में से सिर्फ 300 पर अमल हुआ है, जो दर्शाता है कि सीएम वीरभद्र सिंह सिर्फ झूठी घोषणाएं कर सस्ती वाहवाही लूटने का प्रयास करते हैं, उनका प्रदेश के विकास व जन समस्याओं के समाधान से कोई सरोकार नहीं है। बीजेपी का यह भी आरोप है कि वीरभद्र सरकार खुद तो विकास के काम कर नहीं रही, परन्तु केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को दी गई सौगातों का लाभ भी नहीं उठा पा रही है। बीजेपी की केन्द्र सरकार ने 61 राष्ट्रीय उच्च मार्ग व 3 फोरलेन हिमाचल प्रदेश को दिए, परन्तु वीरभद्र सरकार अभी तक एक भी डीपीआर नहीं बना सकी। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए भी प्रदेश से डीपीआर न भेजना इस सरकार की नाकामी को दर्शाता है। बद्दी में बीजेपी की कार्यसमिति की बैठक के पहले दिन नयनादेवी के विधायक रणधीर शर्मा ने बैठक के दौरान हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य पर एक प्रस्ताव पेश किया, जिसका समूचे सदन ने समर्थन किया।


  • bjp-baddi3केवल घोषणा मंत्री बनकर रह गए हैं सीएम वीरभद्र सिंह,जन समस्याओं से नहीं सरोकार  
  • खुद तो विकास नहीं करवा रही सरकार,केन्द्र की सौगातों का भी नहीं उठा पा रही लाभ

प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति का दृढ़ मत है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार हिमाचल प्रदेश की सबसे भ्रष्ट व निकम्मी सरकार है। इसलिए इसका सत्ता में बना रहना न तो प्रदेशहित में है और न ही जनहित में। इसलिए बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति इस प्रस्ताव के माध्यम से प्रदेश की जनता से भ्रष्टाचार की दलदल में फंस चुकी इस निकम्मी सरकार को सत्ता से बाहर करने और फिर से प्रदेशहित व जनहित में काम करने वाली बीजेपी की सरकार बनाने का आह्वान करती है। प्रस्ताव के अनुसार हिमाचल प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार का यह चार वर्ष का कार्यकाल अत्यंत निराशाजनक रहा है। इस दौरान न तो इस सरकार ने प्रदेश का विकास किया और न ही जनता की समस्याओं का समाधान। यहां तक कि पिछले विधान सभा चुनाव में अपने घोषणा-पत्र में जनता से किए वादों को भी पूरा करने में यह सरकार नाकाम रही है। वर्ष 2012 में हुए विधान सभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र में बेरोजगार नौजवानों को बेरोजगारी भत्ता देने का वादा प्रमुखता से किया था, जिसके कारण नौजवानों ने कांग्रेस पार्टी की सरकार बनाने में अहम भूमिका अदा की थी, परन्तु अब सीएम वीरभद्र सिंह द्वारा बेरोजगारी भत्ता देने से साफ इंकार कर दिया जो नौजवानों के साथ धोखा है।

charge-sheetकेंद्रीय जांच एजेंसी करे चार्जशीट की जांच
सीएम वीरभद्र सरकार ने अपना यह कार्यकाल अपने ऊपर लगे आए से अधिक संपत्ति व भ्रष्टाचार के मामलों से बचने का प्रबंध करने में बीता दिए। पूरी की पूरी सरकार भ्रष्टाचार में संलिप्त रही। इन चार वर्षों की अगर इस सरकार की कोई उपलब्धि है तो वह भ्रष्टाचार ही है, जिसके सम्बन्ध में इस सरकार का 4 साल का कार्यकाल पूरा होने पर 24 दिसम्बर 6 को प्रदेश बीजेपी ने राज्यपाल को एक चार्जशीट सौंपी थी, जिसमें सीएम सहित सरकार के 41 कर्णधारों पर भ्रष्टाचार के प्रमाणों सहित आरोप लगाए गए। इसमें शामिल किसी भी कांग्रेसी नेता ने अपने ऊपर लगे आरोप पर सफाई नहीं दी और न ही सीएम चार्जशीट में लगे आरोपों की जांच करवाने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं। अदालतों में जाने की धमकियां देने वालों ने अभी तक एक भी मामला दर्ज नहीं किया जो चार्जशीट की सत्यता की पुष्टि करती है। बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति भी राज्यपाल से इस चार्जशीट की जांच किसी केंद्रीय जांच एजेंसी से करवाने की मांग करती है।

aligationराजनीतिक प्रस्ताव में यह भी आरोप

  • मजदूरों की दिहाड़ी 200 रुपये करने का वादा भी अधूरा ही रहा, क्योंकि मनरेगा में अभी भी हिमाचल प्रदेश में मजदूरों की दिहाड़ी 170 रुपये ही मिल रही है, जबकि पड़ोसी राज्यों मे यह दिहाड़ी 200 रुपये से ज्यादा है।
  • कर्मचारियों को 4-9-14 का लाभ 2006 से देने का वादा भी अभी तक वीरभद्र सरकार ने पूरा नहीं किया और न ही किसानों-बागवानों की जंगली जानवारों व आवारा पशुओं की समस्या का निराकरण करने के वादे को अमलीजामा पहनाया गया। हिमाचल प्रदेश के भूमिहीन लोगों को जमीन देने के वादे को भी पूरा करना अभी बाकि है।
  • सत्ता में आते ही पिछली बीजेपी सरकार के समय खोले महाविद्यालयों और अपग्रेड किए सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को बंद किया तथा शिक्षकों, विद्यार्थियों के विरोध के बावजूद रूसा पद्धति को लागू किया।
  • पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले हिमाचल पथ परिवहन निगम के सैकड़ों रूटों को बंद कर देने से आम गरीब आदमी को आने-जाने की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। हिमाचल जैसे कल्याणकारी राज्य में ऐसा कदम उठाना निंदनीय है।
  •  प्रदेश भर में शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों व स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की भारी कमी से जनता परेशान है। ऐसे में डॉक्टरों की भर्ती हेतु वॉक इन इंटरव्यू की प्रथा को बंद करने की बीजेपी ने कड़ी आलोचना की है।
  • सड़क, बिजली व पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति में भी वर्तमान वीरभद्र सरकार पूरी तरह विफल रही है। सड़कों की दुर्दशा के कारण विगत 4 सालों में सैंकड़ों दुर्घटनाएं हुई, हजारों लोग गंभीर चोटों का शिकार हुए।
  • पेयजल की अशुद्धता के कारण प्रदेशभर में पीलिया फैला, 70 लोगों की मृत्यु हुई व 15000 लोग पीलिया की चपेट में आए। आज भी प्रदेश की 60 प्रतिशत पेयजल योजनाओं के फिल्टर खराब हैं। बिजली का आना-जाना अब हिमाचल में भी आम बात हो गई है।
  • बर्फबारी होने के 5 दिन बाद भी सड़क, बिजली व पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को वीरभद्र सरकार बहाल करने में पूरी तरह नाकाम रही है। प्रदेश की राजधानी शिमला में भी अभी तक जन-जीवन अस्त-व्यस्त है।
  • किसानों-बागवानों के हित की कृषि फसल बीमा योजना को लागू करने के लिए वीरभद्र सरकार ने कोई कदम न उठाकर अपना किसान-बागवान विरोधी रवैया उजागर किया है। 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत केन्द्र से पंचायतों को सीधे आई धनराशि को खर्च करने में भी यह सरकार रोड़े अटका रही है।
  • आईआईएम व एम्स जैसे संस्थानों के रूप में मोदी सरकार द्वारा दिए तोहफों के लिए उपलब्ध करवाई गई जमीन की वन विभाग से एनओसी लेने में भी यह सरकार कोई रुचि नहीं दिखा रही है। भारत सरकार के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश में खुलने वाले मेडिकल कॉलेजों व अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के प्रोजेक्टों के लिए आई 1430 करोड़ की धनराशि को भी खर्च करने में असफल रही है।
  • प्राकृतिक आपदाओं से फसलों के नुकसान की भरपाई हेतु केन्द्र सरकार द्वारा भेजी गई मुआवजा राशि भी किसानों-बागवानों तक नहीं पहुंचाई जा रही।
  •  हिमाचल प्रदेश की वीरभद्र सरकार में विगत चार वर्षों में कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ गई हैं।  मंडी में चोरी की गाड़ियों का जखीरा मिलना और उसमें पुलिस कर्मियों का शामिल होना, शिमला में अपहरण किए गए बच्चे के शव का पीने के पानी के टैंक में मिलना, नाहन में बारूद का जखीरा मिलना व बम का फटना, काला अम्ब में कारतूसों का भंडार मिलना, कुल्लू से इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकवादी संगठन से सम्बन्धित आतंकवादी का पकड़ा जाना कुछ ऐसी घटनाएं हैं जो बिगड़ती कानून व्यवस्था की पोल खोलती है।
  • ड्रग माफिया व शराब माफिया ने भी कानून व्यवस्था की जड़ें हिला दी हैं। बिगड़ती कानून व्यवस्था का मुख्य कारण है कि वर्तमान सरकार के कर्णधारों का माफिया व असामाजिक तत्वों को खुला संरक्षण प्राप्त है। ईमानदार अधिकारी अगर कार्रवाई करता है तो उसका तबादला कर सजा दी जाती है। बेईमान अफसरों को पदोन्नत कर सम्मानित किया जाता है।
  • 4 वर्षों में ऐसा नहीं लगा कि प्रदेश में कोई सरकार भी है बल्कि ऐसा लगा कि प्रदेश में माफिया राज है, क्योंकि इस सरकार में वन माफिया, खनन माफिया, भू-माफिया, ड्रग माफिया, शराब माफिया व तबादला माफिया हावी रहा

 

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