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छोटी जाति के थे इसलिए अवैध कब्जे हटाने से बच्चों सहित बेघर हुए लोगों को मंदिर में नहीं दी शरण

छोटी जाति के थे इसलिए अवैध कब्जे हटाने से बच्चों सहित बेघर हुए लोगों को मंदिर में नहीं दी शरण

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पालमपुर। हिमाचल भी अभी तक छुआछूत की बेड़ियों से मुक्त नहीं हो पाया है। ऐसा ही एक मामला पालमपुर के नजदीक ठाकुरद्वारा में देखने को मिला। जहां पर वन विभाग के अवैध कब्जे हटाने पर अपने छोटे-छोटे बच्चों सहित बेघर हुए लोगों के लिए एक मंदिर के दरवाजे इसलिए नहीं  खोले गए, क्योंकि वह लोग निचली जाती से संबंध रखते थे। ऐसे में बेघर हुए लोगों को अपने बच्चों सहित रात काटने की चिंता सताने लगी। पर जहां पर मंदिर में शरण न देने वाले लोग हैं तो वहीं पर कुछ दयालु भी हैं। ऐसे में एक व्यक्ति ने सामने से आकर इन बेघरों को अपने आशियाने में शरण दी।

बता दें कि ठाकुरद्वारा के पास ही एक रामनगर कॉलोनी में मुलथान के कुछ लोगों ने झोपड़ियां बनाकर अवैध कब्जा किया था। आज वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए 6 में से चार झोपड़ियों को गिरा दिया और दो को कल गिराया जाएगा। ऐसे में बेघर हुए लोगों के पास रहने का ठिकाना नहीं बचा। लोगों ने पास के ही एक मंदिर में एक रात रहने की मोहल्लत मांगी। पर कमेटी ने मंदिर में रहने की इजाजत नहीं दी।

बताया जा रहा है कि इजाजत इसलिए नहीं दी कि यह लोग निचली जाती से संबंध रखते हैं। अब सवाल यह है कि वन भूमि पर अवैध कब्जे हटाकर वन विभाग ने तो सही किया है पर निचली जाति का होने के चलते मंदिर में इन बेघरों को शरण न देना सही था। हिमाचल जैसे प्रदेश में यह चिंतनीय विषय है। जब अवैध कब्जे हटाने से बेघर हुए लोगों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मंदिर में एक रात गुजारने के लिए कमेटी से मोहल्लत मांगी, लेकिन कमेटी ने यह कहकर मना कर दिया कि आप लोग छोटी जाति के हो। मंदिर में समान भी रखा था, वह भी बाहर फेंक दिया।

डीएसपी पालमपुर से जब बात की तो उन्होंने कहा कि डीएफओ ही इस बारे में बता सकते हैं। डीएफओ पालमपुर बलबीर सिंह यादन ने बताया कि छह अवैध कब्जों में से चार अवैध कब्जे आज गिरा दिए हैं। दो कल गिराएं जाएंगे। लोगों के रहने की बात पर उन्होंने कहा कि यह देखना प्रशासन का काम है।

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